— दृष्टिबाधित और लो—विजन विद्यार्थियों की किताबों का मामला, कक्षा 9 से 12 तक की किताबें तैयार करानी हैं
जयपुर। एक ओर तो सरकार सबको पढ़ाने का नारा दे रही है, दूसरी ओर वहीं सरकार सत्र शुरू होने तक विद्यार्थियों को कोर्स की किताबें भी उपलब्ध नहीं करा पा रही है। ये किताबें भी उन विद्यार्थियों के लिए है, जो देख नहीं सकते या फिर जिन्हें बहुत कम दिखार्इ् देता है। ये विद्यार्थी सामान्य विद्यार्थियों से अलग हैं। इन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब ये विद्यार्थी बिना किताबों के परेशान हो रहे हैं। उनका कहना है कि वे बिना किताबों के ग्रीष्मावकाश में पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। जबकि दूसरे सामान्य विद्यार्थियों के लिए किताबें बाजार में आ गई हैं। हालांकि कई विषयों की किताबें सामान्य विद्यार्थियों की भी अभी तक नहीं आई हैं। गौरतलब है कि प्रदेश में करीब 10 हजार से अधिक विद्यार्थी नेत्रहीन हैं, जो शहर के सरकारी व निजी स्कूलों में अध्ययनरत हैं।
अब तैयारी कर रहा विभाग
नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। अब ग्रीष्मावकाश चल रहा है, लेकिन अभी तक दृष्टिबाधित और लो—विजन विद्यार्थियों की किताबें नहीं आई हैं। विभाग की लापरवाही का आलम ये है कि अब विभाग इन विद्यार्थियों की किताबें मंगवाने की तैयारी कर रहा है। राजस्थान माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सत्र 2018—19 के लिए दृष्टिबाधित और लो—विजन विद्यार्थियों की किताबें तैयार कराने के लिए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से किताबों की विषयवार संख्या मांगी है। हालात ये हैं कि बिना किताबों के इन विद्यार्थियों का अध्ययन कार्य नहीं हो सकता है। ये किताबें सभी सरकारी और निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए छपवाई जाती हैं।
ये मांगी सूचना
दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ब्रेल पुस्तकें और लो—वितन विद्यार्थियों के लिए लार्ज प्रिन्ट की पुस्तकें विषयवार तैयार कराई जानी हैं। इसके लिए विद्यार्थी का नाम, विद्यालय का नाम, ब्लॉक, विषय का नाम आदि की जानकारी मांगी है। कक्षा 11 व 12 के लिए ऐच्छिक विषय का नाम अलग से देना है। अभी तक तो विभाग इन किताबों के लिए सिर्फ विद्यार्थियों की संख्या ही मांग रहा है। हालात ये हैं कि बिना किताबों के ही सरकार और शिक्षा विभाग ने नया शिक्षा सत्र भी शुरू कर दिया है।