जयपुर

मौसम अलर्ट! प्रदेश में नहीं टला है अभी तूफानी संकट, 48 घंटे में फिर से मौसम बिगड़ने की चेतावनी

मौसम अलर्ट! प्रदेश में नहीं टला अभी तूफानी संकट, 48 घंटे में फिर से मौसम बिगड़ने की चेतावनी  
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Updated: 9 May 2018, 9:57 AM IST
dust storm in bikaner
dust storm in bikaner

जयपुर।

सोमवार देर रात से प्रदेश के पश्चिमी हिस्सों में चली धूलभरी हवा और अंधड़ से जन जीवन प्रभावित रहा और लोग तूफान की आशंका से भयभीत रहे। वहीं अगले चार दिनों तक मौसम का मिजाज सुधरने से मौसम वैज्ञानिकों ने इंकार किया है। मौसम विभाग की मानें तो उत्तरी राज्यों में अब भी चक्रवाती तंत्र सक्रिय बना हुआ है और अरब सागर की तरफ से आ रही सतही हवाओं के कारण प्रदेश में अगले चार दिन चक्रवाती तंत्र सक्रिय होने के कारण अंधड़ चलने का अंदेशा है।

बीते चौबीस घंटे में जहां तेज रफ्तार से धूलभरी हवाएं चली और जनजीवन प्रभावित रहा वहीं दिन व रात के तापमान में आई गिरावट ने प्रदेशवासियों को झुलसाती गर्मी से राहत दिलाई। वहीं मौसम केंद्र ने अगले 48 घंटे में पश्चिमी इलाकों में धूलभरी हवाएं चलने और दिन में पारा 40 से 44 डिग्री के बीच रहने का अनुमान जताया है। इसके साथ ही अगले 24 घंटे में पूर्वोत्तर हिस्सों में छितराई बौछारें गिर सकती हैं। बीती रात अजमेर में हल्की बूंदाबांदी से मौसम ने पलटा खाया वहीं जयपुर में भी छितराई बौछारें मौसम केंद्र ने रिकॉर्ड की है।

राजधानी में मंगलवार को चले अंधड़ के बाद दोपहर से मौसम का मिजाज बदला और आसमान साफ होते ही गर्मी ने तीखे तेवर दिखाए। हालांकि मंगलवार को शहर का अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहा लेकिन शहरवासियों को झुलसाती गर्मी का अहसास हुआ। शहर में आज सुबह आसमान साफ रहा और सुबह नौ बजे शहर का अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ है।

स्थानीय मौसम केंद्र के अनुसार शहर में आज सुबह दस किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चली दक्षिण पूर्वी हवा सुबह मौसम शुष्क रहा वहीं मौसम केंद्र ने अगले चौबीस घंटे में धूलभरी हवाओं के साथ आज शहर का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक रहने का अनुमान जताया है। राडार हुआ दुरुस्त लंबे इंतजार के बाद जयपुर स्थित मौसम केंद्र पर खराब पड़ा डाप्लर राडार आखिरकार सोमवार शाम दुुरुस्त हो गया है। मौसम केंद्र के अनुसार राडार से मौसम के पूर्वानुमान मिलने शुरू हो गए हैं और आगामी दिनों में मौसम में संभावित बड़े बदलावों पर मौसम वैज्ञानिक चौबीस घंटे निगरानी बनाए हुए है।

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