जयपुर

इन्हें चाहिए महापौर की कुर्सी, इसलिए चेताया— बिना चर्चा थोपा नया महापौर तो देंगे कांग्रेस का साथ

महापौर पद के लिए शुरू हुई लॉबिंग इतनी तेज हो गई है कि अब दावेदारों ने भाजपा संगठन को चेता दिया है
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Dec 15, 2018
jaipur nagar nigam
इन्हें चाहिए महापौर की कुर्सी, इसलिए चेताया— बिना चर्चा थोपा नया महापौर तो देंगे कांग्रेस का साथ

भवनेश गुप्ता . जयपुर। महापौर पद के लिए शुरू हुई लॉबिंग तहत दावेदारों ने शहर के सभी विधायकों से लेकर पूर्व मुख्यमंत्री तक पहुंच बनानी शुरू कर दी है। कुछ दावेदारों ने तो शहर संगठन मुखिया को संकेत दे दिए हैं कि यदि पार्षदों से चर्चा किए बिना महापौर के लिए चेहरा तय किया जाता है तो फिर कांग्रेस से हाथ मिलाने भी संकोच नहीं होगा। इसके बाद चिंता ज्यादा बढ़ गई है और तालमेल बैठाने की जुगत में है। इसके लिए जल्द ही पार्षदों के साथ बैठक भी हो सकती है, जिससे की बागी जैसी स्थिति नहीं बने। सूत्रों के मुताबिक उपमहापौर मनोज भारद्वाज के अलावा पार्षद विष्णु लाटा, अनिल शर्मा, भगवत सिंह देवल, मान पंडित दावेदारी जताने में आगे हैं। जबकि, विधायक बने अशोक लाहोटी अपने चेहते को इस सीट पर बैठाना चाह रहे हैं। हालांकि, अभी तक वे यही कह रहे हैं कि वे दोनों पद पर काम करते रहेंगे। इसके लिए एक लाभ के पद का उपयोग नहीं करने का दावा कर रहे हैं।

चुनाव नजदीक, इसलिए चिंता बढ़ी...
दस माह बाद ही नगर निगम में पार्षद चुनाव होने हैं और इससे पहले लोकसभा के चुनाव हैं। इसी कारण संगठन चिंता में है। उन्हें चिंता सता रही है कि यदि कथित पार्षदों के बागी होने की स्थिति बनी तो इससे न केवल पार्टी की साख खराब होगी, बल्कि आगामी चुनाव में भी इसका असर पड़ सकता है। इसी कारण पार्टी फूंक—फूंक कर कदम बढ़ा रही है।

कौन—कहां दावा कर रहा...
—उपमहापौर मनोज भारद्वाज के लिए संगठन के एक महामंत्री सक्रिय हैं। साथ ही एक धार्मिक स्थल के महंत का साथ भी लिया जा रहा है। कई विधायकों से संपर्क बनाया।
—पार्षद विष्णु लाटा एक दिन पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री से मिल चुके हैं। उन्होंने सांगानेर विधानसभा सीट पर प्रत्याशी के साथ देने की बात दोहराई।
—पार्षद अनिल शर्मा व भगवत सिंह देवल बिल्कुल नहीं चाहते कि अशोक लाहोटी के चहेते तो यह पद मिले। उन्होंने इस पद के लिए खुद की दावेदारी के साथ उपमहापौर के लिए भी चर्चा छेड़ दी है। सूत्रोें की मानें तो इन्होंने पार्षदों से चर्चा करने के बाद ही नाम फाइनल करने के लिए कहा है। निर्वतमान मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से भी मिले।
—महापौर अशोक लाहोटी के साथ चुनाव के दौरान पार्षद मुकेश लख्यानी साथ रहे। लाहोटी लख्यानी के लिए जोर दे सकते हैं।

यूं समझें गणित...
भाजपा के 64 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के बैनर पर 18 पार्षद चुनकर निगम पहुंचे। इनके अलावा 9 निर्दलीय हैं और ज्यादातर ने कांग्रेस को समर्थन दे रखा है। महापौर चुनने के लिए यदि समर्थन प्रक्रिया की जरूरत पड़ती है तो 46 पार्षद चाहिए होंगे। बोर्ड भाजपा का है, इसलिए सामान्य तौर पर चिंता नहीं है लेकिन यदि चर्चा बिना महापौर का नाम तय किया जाता है तो फिर कथित भाजपा पार्षद विरोध में आ सकते हैं। इससे चिंता बढ़ेगी।

Published on:
15 Dec 2018 11:55 pm