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Gulab Kothari Article : इस परिवेश में पलने वाली नई पीढ़ी में संवेदना है ही नहीं क्योंकि उसके पास वो मन नहीं है जिसका निर्माण मां के अन्न से हो रहा है। नई पीढ़ी की माता आज न भोजन बनाने को तैयार है और ना ही बालको को संस्कार देने को। ऐसे में बालक एक तरह से भावनाहीन अन्न का ग्रहण कर रहा है जो या तो उसे बाजार से मिलता है या घर में ही रसोइये बनाते हैं।
Updated on:
05 Sept 2026 03:36 pm
Published on:
05 Sept 2026 03:36 pm
