आम आदमी की रसोई पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर जहां हरी सब्जियों के दाम आसमान पर हैं, वहीं दूसरी तरफ दालों के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं।
आम आदमी की रसोई पर दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर जहां हरी सब्जियों के दाम आसमान पर हैं, वहीं दूसरी तरफ दालों के दामों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं। अरहर दाल के दाम तो इस साल 30 फीसदी तक बढ़ गए है। जून में ही अरहर दाल का भाव पांच रुपए प्रति किलोग्राम की तेजी दर्ज की गई है। अरहर के साथ ही उड़द और मूंग दाल की कीमतें भी लगातार बढ़ी हैं। सरकार ने दालों के दाम काबू में रखने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन फिलहाल दाम काबू में नहीं आ पा रहे हैं।
कारगर नहीं हुए सरकारी प्रयास
राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि इस साल उड़द दाल जहां 10 रुपए किलो महंगी हुई हैं, वहीं मूंग दाल के दाम 8 रुपए प्रति किलो चढ़ चुके है। सरकार ने दालों के दाम काबू में करने के लिए अरहर और उड़द दाल पर लगने वाली सामान्य कस्टम ड्यूटी को भी जीरो कर दिया है, फिर भी खाद्य मंडियों में इनके दाम कम नहीं हो रहे है। मानसून में देरी, कहीं ज्यादा कहीं कम बारिश होने की वजह से अगले सीजन के लिए दाल की बुवाई कम हुई है। 15 जुलाई तक पिछले साल के मुकाबले 25.8 फीसदी कम रकबे पर दलहन फसलों की बुआई हुई है।