जयपुर शहर में कोहरे का असर ऐसा था कि विश्व प्रसिद्ध आमेर महल की भव्यता और शान दोपहर तक कोहरे में छिपी रही।
जयपुर। शहर में मंगलवार को कोहरे का असर स्मारकों पर भी दिखा। कोहरे का असर ऐसा था कि विश्व प्रसिद्ध आमेर महल की भव्यता और शान दोपहर तक कोहरे में छिपी रही। महल की दीवारें,बुर्ज जैसे मौन साधे खडे थे। ऐसा लग रहा था जैसे महल का इतिहास व वर्तमान एक फ्रेम में समा गए हों। सुबह 10 बजे तक महल देखने के लिए पहुंचे पर्यटक वहां का नजारा देख कर हैरान रह गए। चारों तरफ कोहरा ही कोहरा होने के कारण महल का दीदार नहीं कर सके और महल के चौक में कोहरा छंटने का इंतजार करते पर्यटक खुद ही तस्वीर बन गए। पर्यटक दोपहर तक कोहरे में विरासत की झलक को तलाशते रहे। दोपहर 12 बजे बाद जब कोहरा छंटा तो पर्यटकों को महल के दीदार हुए। कोहरे के कारण हाथी सवारी भी एक तरह से बंद रही। जल महल की पाल पर भी ऐसा ही हाल देखने को मिला। यहां भी दोपहर तक पर्यटक जलमहल का नजारा नहीं देख पाए।
उधर जयपुर शहर में भी कोहरे के कारण यही हाल था। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर तो विजिबिलिटी एक मीटर से भी कम रह गई। वाहन चालकों को दिन में ही वाहनों की लाइटें जलानी पड़ी। लोग कडाके की सर्दी के कारण घरों से बाहर नहीं निकल सके और सड़कों पर जगह जगह अलवा जला कर आग तापते दिखे। दोपहर 12 बजे बाद जब धूप निकली तो सडकों व बाजारों में आवाजाही शुरू हुई।
परकोटा के बाजारों में जहां सुबह से ही रौनक शुरू हो जाती है वहीं मंगलवार को दोपहर तक सन्नाटा सा रहा। दुकानदारों ने दुकानें नहीं खोली और सूरज निकलते तक दुकानों के बाहर अलावा जला कर हाथ तापते दिखे। ऐसे में लगा की कोहने ने पराकोटा भी पूरा थाम दिया