
जयपुर। प्रदेश में मुख्यमंत्री और दो डिप्टी सीएम की घोषणा के बाद अब भाजपा में मंत्रिमंडल गठन की कवायद चल रही है। मंत्रिमंडल तैयार करने में जातिगत और क्षेत्रीय संतुलन भी देखा जा रहा है लेकिन इस बार कोई भी अल्पसंख्यक खासतौर पर मुस्लिम चेहरा कैबिनेट में देखने को नहीं मिलेगा। 25 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है जब मंत्रिमंडल में एक भी अल्पसंख्यक चेहरा नहीं है। 1998 से लेकर 2018 में बनी सरकारों में एक या दो मुस्लिम चेहरे कैबिनेट में रहे हैं।
यूनुस खान दो बार कैबिनेट में रहे
साल 2003 और 2013 में वसुंधरा सरकार में यूनुस खान दो बार पावरफुल कैबिनेट मंत्री रहे, लेकिन इस बार के चुनाव में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया था, जिसके बाद यूनुस खान ने डीडवाना से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
किसे मिलेंगे अल्पसंख्यक महकमे?
इधर सियासी गलियारों में चर्चा इस बात को लेकर भी है कि कैबिनेट में कोई भी मु्स्लिम चेहरा नहीं होने पर अब अल्पसंख्यक मामलात और अन्य विभाग किसे सौंपे जाएंगे। प्रदेश में यूपी की तरह विधान परिषद भी नहीं है, जहां विधानपरिषद से सदस्य बनाकर कैबिनेट में शामिल किया गया था। वहीं इस बार कोई भी मुस्लिम चेहरा कैबिनेट में नहीं होने से अल्पसंख्यक वर्ग में भी अंदरखाने नाराजगी है।
25 सालों में ये मुस्लिम चेहरे रहे मंत्री
1998 में गहलोत सरकार के पहले कार्यकाल में चौधरी तय्यब हुसैन, अब्दुल अजीज और हबीबुर्रहमान मंत्री रह चुके हैं। 2008 से 2013 के बीच गहलोत सरकार के दूसरे कार्यकाल में दुर्रू मियां और नसीम अख्तर इंसाफ मंत्री रह चुके हैं। गहलोत सरकार के तीसरे कार्यकाल में सालेह मोहम्मद और जाहिदा खान मंत्री रह चुके हैं। वहीं 2003 से लेकर 2008 और 2013 से 2018 तक यूनुस खान भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
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