जयपुर

चश्मों में गिलास की जगह लगी हैं हीरे—पन्ने की परतें, कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

बेशकीमती हैं ये चश्मे: दुर्लभ पन्ने से बना लेंस, सोने का फ्रेम और लगे हैं असली डायमंड्स
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Oct 12, 2021
चश्मों में गिलास की जगह लगी हैं हीरे—पन्ने की परतें, कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान
चश्मों में गिलास की जगह लगी हैं हीरे—पन्ने की परतें, कीमत जानकर रह जाएंगे हैरान

- मुगल कालीन चश्मों की होगी लंदन में नीलामी

- 17वीं सदी में भारत के फैशन का है प्रमाण

- 22 अक्टूबर से इन्हें लंदन के सोथबी में प्रदर्शित किया जाएगा


जयपुर। भारत और यहां के लोगों का फैशन से गहरा नाता रहा है। 17वीं सदी में भी देश के मुगल शासक धूप के चश्में पहनते थे। ये बात और है कि इन चश्मों में रंगीन लेंस के लिए कांच की जगह कीमती रत्नों की पतली परत का उपयोग किया जाता था। वहीं सोने के फ्रेम में इसे बनाया जाता है। सुंदरता बढ़ाने के लिए इसमें डायमंड्स लगाए जाते थे।

इसलिए खास हैं

अब मुगल कालीन युग के ऐसे ही को दुर्लभ चश्मों की लंदन में नीलामी होने जा रही है। इनमें से एक में पन्ने के लेंस लगे हैं, जिसे नाम दिया गया है गेट ऑफ पैराडाइज। वहीं दूसरे चश्मे को हेलो ऑफ लाइन नाम दिया गया है। 22 अक्टूबर से इन्हें लंदन के सोथबी में प्रदर्शित किया जाएगा। नीलामी 27 अक्टूबर को होगी।

राजसी खजाने से हैं

सोथबी के अध्यक्ष एडवर्ड गिब्स के अनुसार भारत में 17वीं सदी के मुगल काल के एक अज्ञात राजसी खजाने से दुर्लभ रत्नों वाले चश्मे पहली बार नीलाम किए जाएंगे। चश्मों की शुरुआती कीमत पंद्रह करोड़ से पच्चीस करोड़ रुपए रखी गई है। यह भारत के असाधारण फैशन का उदाहरण हैं। माना जाता है कि यह पन्ना और हीरा दक्षिण भारत में गोलकुंडा की खदानों से निकाला गया था। विशेषज्ञों का कहना है कि असली रत्नों से बने इन चश्मों का उपयोग नजरें ठीक करने के लिए किया जाता था।

शाहजहां ने किया था पन्ने का इस्तेमाल

इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां आंखों की रोशनी के लिए हीरे—पन्ने का उपयोग किया गया। इतिहासकारों के अनुसार मुमताज महल की मौत के बाद शाहजहां इतने रोए कि उनकी आंखें कमजोर हो गईं, जिन्हें ठीक करने के लिए पन्ने का इस्तेमाल किया गया था।

Published on:
12 Oct 2021 03:28 pm