
जयपुर। राजधानी जयपुर में मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद नशे का कारोबार थमता नजर नहीं आ रहा। इसका सबसे खतरनाक असर अब समाज और परिवारों पर दिखाई देने लगा है। नशे की गिरफ्त में आए लोग मामूली विवाद पर अपनों की जान लेने तक उतर रहे हैं। स्कूल-कॉलेजों से लेकर कच्ची बस्तियों तक नशीले पदार्थों की आसान पहुंच के कारण बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं और कम उम्र में ही अपराध की राह पकड़ रहे हैं।
जून 2026 में जयपुर में हुई करीब आधा दर्जन हत्याओं में से लगभग आधी वारदातों में नशे की भूमिका सामने आने से यह चिंता और गहरा गई है। पुलिस और समाज के लिए यह केवल कानून- व्यवस्था का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य का भी गंभीर संकट बन चुका है।
जयसिंहपुरा खोर में जयप्रकाश हत्याकांड में पुलिस ने उसके भतीजे नीतिश कुमार और उसके साथी विकास कुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि जयप्रकाश उनकी मजदूरी के पैसे ले लेता था और शराब पी जाता था। उसने उनको भी शराब की लत लगा दी थी। अभद्र व्यवहार और पुरानी रंजिश के चलते दोनों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी।
खोह नागोरियान निवासी अनिल बैरवा ने नशा सामग्री खरीदने के लिए अपनी मां से पैसे मांगे। पैसे देने से इनकार करने पर उसने मां की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
मुहाना थाना क्षेत्र में 10 वर्षीय बच्चे की हत्या के मामले में पुलिस ने 11 और 12 वर्ष आयु के तीन नाबालिगों को निरुद्ध किया। जांच में सामने आया कि मृतक ने अपनी बहन से अभद्रता का विरोध किया था, जिससे नाराज होकर आरोपियों ने उसकी हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार, आरोप है कि तीनों नाबालिग कम उम्र में ही नशा करने के आदी थे।
सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई से स्पष्ट होता है कि जयपुर में मादक पदार्थ बाहर से आता है।
पाकिस्तान सीमाः श्रीगंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे सीमावर्ती जिलों से हेरोइन और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी होती है।
मध्य प्रदेश: मंदसौर, नीमच और रतलाम क्षेत्र से अवैध अफीम, डोडा-चूरा व उससे जुड़े पदार्थ राजस्थान के रास्ते जयपुर पहुंचते हैं।
पंजाब और हरियाणाः सिंथेटिक ड्रग्स (एमडी, एमडीएमए, आइस आदि) की सप्लाई चेन का एक हिस्सा जयपुर तक पहुंचता है।
गुजरात मार्गः समुद्री रास्तों से भारत में आने वाले कुछ नशीले पदार्थ गुजरात के माध्यम से राजस्थान तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
राजस्थान के अंदरूनी जिलेः नागौर, जोधपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, जोधपुर और अन्य जिलों से भी ड्रग्स जयपुर पहुंचता है।
नशा और अपराध का गहरा संबंध है। करीब 70 प्रतिशत अपराध करने वाले लोगों में किसी न किसी प्रकार के नशे की लत पाई जाती है। अपराध छोटा हो या बड़ा, कई लोग अपनी नशे की लत पूरी करने के लिए वारदातों को अंजाम देते हैं। नशे की हालत में व्यक्ति सही और गलत का विवेक खो बैठता है, जिससे अपराध की आशंका बढ़ जाती है। बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है। बच्चों और युवाओं की गतिविधियों पर परिजनों को विशेष नजर रखनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति में नशे की लत के लक्षण दिखाई दें तो समय रहते मनोचिकित्सक की सलाह लेकर उसका उपचार शुरू कराना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि व्यक्ति में नशा छोड़ने की दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो वह इस लत से बाहर निकल सकता है।
-डॉ. ललित बत्रा, वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ, राजकीय मनोचिकित्सालय केन्द्र जयपुर