राजधानी के परकोटा क्षेत्र के सम्मान पर संकट है। यूनेस्को गाइडलाइन के अनुसार विरासत वाले हिस्से को सुरक्षित रखने के लिए व्यापक योजना बनाना और उस पर काम जरूरी है। लेकिन निगम सहित अन्य महकमों ने कोई काम ही शुरू नहीं किया। अब दिसंबर तक का समय यूनेस्को ने सब कुछ सही करने के लिए दिया है।
जयपुर। राजधानी के परकोटा क्षेत्र का सम्मान खतरे में है। इसे बचाने के लिए सरकार के आला अधिकारी सक्रिय हुए हैं। सम्मान बना रहे, इसके लिए जिम्मेदार महकमों के पास नौ माह का समय है। सात मोर्चों पर बेहतर काम करना होगा। मौजूदा समय की बात करे तो हालात बद से बदतर हैं।
यूनेस्को की गाइडलाइन पर गौर करें तो हैरिटेज क्षेत्र को सिर्फ सजाने तक सीमित नहीं रखना होगा, बल्कि उसे सुरक्षित, व्यवस्थित और टिकाऊ बनाना होगा।
इसलिए जरूरी है प्लान
यूनेस्को की गाइडलाइन के अनुसार किसी भी वल्र्ड हैरिटेज सिटी के लिए स्पेशल एरिया हैरिटेज प्लान तैयार करना जरूरी होता है। इस प्लान में सिर्फ इमारतों का संरक्षण ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के समग्र विकास का रोडमैप शामिल होता है। इस योजना के तहत सात प्रमुख क्षेत्रों पर काम करना होगा।
इन सात घटकों पर करना होगा काम
1- विरासत संरक्षण योजना: हवेलियों व अन्य निर्माणों को तोडक़र नए निर्माण होने से मूल स्वरूप खोता जा रहा है।
ये करना होगा: बिल्डिग बॉयलॉज के अनुरूप काम होने के साथ नियमित निगरानी जरूरी।
2-सामाजिक और भौतिक अवसंरचना योजना: परकोटा क्षेत्र में सुधार का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत में गंदगी, टूटी सडक़ें और अव्यवस्था साफ नजर आती है।
ये करना होगा: अभियान चलाकर व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी होंगी। कचरे के ढेर सडक़ किनारे नजर नही आएं।
3- परिवहन और गतिशीलता योजना: इसका मकसद जाम से राहत देना है, लेकिन परकोटे की तंग गलियों में हालात बद से बदतर हैं। जाम अब पहचान बन चुका है।
ये करना होगा: वाहनों की संख्या को सीमित किया जाए। रामनिवास बाग की भूमिगत पार्किंग को उपयोगी बनाया जाए और गाडिय़ों को वहीं रोका जाए।
4-पर्यटन योजना: इसके तहत विश्वस्तरीय सुविधाओं को विकसित करना था, ताकि सैलानी सुविधाओं का लाभ ले सके। अब तक कुछ भी नहीं बदला है।
ये करना होगा: पर्यटन क्षेत्रों को टूरिस्ट फ्रेंडली बनाना होगा। गाइड प्रोपर मिलें और लपकों को सैलानियों से दूर रखना होगा।
5-आपदा प्रबंधन योजना: इस पर नगर निगम सहित अन्य महकमों ने कोई काम नहीं किया है। आग या हादसे की स्थिति में बचाव कैसे होगा, इसका ठोस इंतजाम नजर नहीं आता।
ये करना होगा: परकोटे में फायर फाइटिंग सिस्टम लगे हुए चार वर्ष का समय हो गया, लेकिन अब तक इसे चालू नही किया गया।
6- पर्यावरण और लैंडस्केप योजना: स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत लैंडस्केपिंग की गई, लेकिन अब ये बदहाल है। हरियाली को लेकर भी परकोटो मे कोई काम नहीं हो रहा।
ये करना होगा: हरियाली बढ़ाने पर जोर देना होगा। तारों का जाल हटाना होगा।अतिक्रमण हटाना होगा। तभी लोगों की राह सुगम होगी।
7-प्रबंधन ढांचा: विश्व विरासत सूची में शामिल हुए परकोटा क्षेत्र को छह वर्ष से अधिक का समय हो चुका है। लेकिन अब तक अधिकारियों में तालमेल का अभाव है।
ये करना होगा: परकोटे को संवारने के लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम का गठन किया जाए तो नियमित रूप से जमीन पर काम करें।