
जयपुर। पहली इंजन रहित ट्रेन ‘ट्रेन-18’ (Train 18) के परीक्षण के बाद से ही सवाल उठने लगे हैं कि क्या देश की पटरियां इन हाईस्पीड ट्रेनों (High Speed Train) के परीक्षण के लिए सुरक्षित हैं? इन सवालों के जवाब में रेलवे ने हाई स्पीड ट्रेनों के ऐसे परीक्षणों के लिए अलग ट्रैक (पटरियां) बिछाने का फैसला किया है।
योजना के अनुसार रेलवे 400 करोड़ रुपए की लागत से जयपुर से पास के ही कस्बे फुलेरा तक 40 किलोमीटर लंबी विशेष पटरियां बिछाएगा। इसके साथ भारत उन देशों के समूह में शामिल हो जाएगा जहां ऐसी हाईस्पीड ट्रेनों के लिए ट्रायल (परीक्षण) ट्रैक होगा।
फिलहाल यह सुविधा अमरीका, जर्मनी, चीन और ऑस्ट्रेलिया में ही उपलब्ध है। यह पटरियां सभी मौसम में सुचारू रूप से चालू रहेंगी। पहले चरण में 25 किमी का ट्रैक बनाया जाएगा। 20 किमी ट्रैक सीधा और बाकी घुमावदार होगा।
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि यह ट्रैक एक प्रयोगशाला की तरह होगा। रेलवे इसके प्रयोग से नए डिब्बों, इंजन, पटरियों की नई तकनीक समेत रेल परिवहन से जुड़ी अन्य तकनीकों का परीक्षण कर सकेगा।