रेनवाल, जोबनेर, फुलेरा ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य वृक्ष खेजड़ी (state tree khejri) पर चल रहे कुल्हाड़े : सांभर उपखंड के रेनवाल, जोबनेर, ड्योढ़ी, फुलेरा क्षेत्र में दिनभर सैकड़ों हरे पेड़ों की कटाई होती है और रात को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर आरा मशीनों पर भेज दिया जाता है, लेकिन वन विभाग, पुलिस प्रशासन, तहसील प्रशासन, उपखंड कार्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
राहुल शर्मा, जयपुर। जिस खेजड़ी के पेड़ों को बचाने के लिए अमृता देवी सहित 363 लोगों ने प्राणों की बलि दे दी थी। वहीं आज सरकारी नुमांइदों की लापरवाही रोज खेजड़ी के सैकड़ों पेड़ों की बलि ले रही है। नतीजतन राज्यवृक्ष (state tree khejri) के अस्तित्व पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। बात करें उपखंड की तो यहां प्रतिदिन सैकड़ों हरे पेड़ों पर कुल्हाड़े चल रहे हैं, जिनमें खेजड़ी (state tree khejri) के पेड़ भी शामिल हैं।
सांभर उपखंड के रेनवाल, जोबनेर, ड्योढ़ी, फुलेरा क्षेत्र में दिनभर सैकड़ों हरे पेड़ों की कटाई होती है और रात को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर आरा मशीनों पर भेज दिया जाता है, लेकिन वन विभाग, पुलिस प्रशासन, तहसील प्रशासन, उपखंड कार्यालय की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
पुलिस का डंडा हटा तो बढ़ी कटाई
करीब 1 वर्ष पहले वन अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के अधिकार पुलिस से छीनकर वन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को दिए जाने के बाद पेड़ों की कटाई का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस के कारण आरा मशीन संचालक व ग्रामीण पेड़ काटने से डरते थे, लेकिन अब यह काम बेखौफ किया जा रहा है।
यहां दिन में हो रही कटाई
ड्योढ़ी, मूंडवाड़ा, श्यामपुरा, प्रतापपुरा, खतवाड़ी, पणिहारी, डोडवाडिया का बास, हरनाथपुरा, खारिया, सुरङ्क्षसहपुरा, माल्यावास, गुमानपुरा, बबेरवालों की ढाणी, आसलपुर जोबनेर, ढाणी बोराज, भैंसलाना सहित आसपास के गांवों में दिनभर हरे पेड़ों की कटाई की जाती है और रात को टै्रक्टर-ट्रॉली या अन्य किसी वाहनों में भरकर कच्चे ग्रेवल रास्तों से रेनवाल सहित ग्रामीण क्षेत्र की आरा मशीनों पर पहुंचाते हैं। विशेषकर शाम 7 से 9 बजे तथा रात दो से पांच बजे तक दर्जनों वाहन राजमार्ग पर कटे हुए पेड़ों से भरकर गुजरते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होने से यह कारोबार फल-फूल रहा है। वहीं कुछ स्थानों पर मध्य रात्रि में भी कटाई की जा रही है।
काश्तकार भी नहीं कर सकता कटाई
जानकारों की मानें तो यदि किसी खेत में कोई हरा पेड़ है तो उसे काटने के लिए संबंधित काश्तकार को प्रशासन से अनुमति लेकर ही पेड़ काटने का अधिकार है। खेजड़ी राज्य वृक्ष है। ऐसे में इसे काटने की स्वीकृति प्रशासन भी नहीं दे सकता, लेकिन ग्रामीण इलाकों में अंधाधुंध तरीके से कटाई की जा रही है। खेजड़ी को 1983 में सरकार ने राज्य वृक्ष घोषित कर कटाई पर रोक लगाई थी। इसकी पत्तियों का जैविक खाद के रूप में उपयोग होता है।
यह कहना है
राज्य वृक्ष खेजड़ी की कटाई मामले की जानकारी मिलने पर रेनवाल तहसील के अंतर्गत सभी पटवारी व गिरदावरों को निर्देश जारी कर हरे-भरे वृक्षों की कटाई मामले में जांच कराई जाएगी। वहीं अवैध आरा मशीनों की जानकारी लेकर वन विभाग व पुलिस प्रशासन की मदद भी लेनी पड़ी तो लेंगे। वहीं उच्च अधिकारियों के दिशा-निर्देश के तहत कार्रवाई करेंगे।
सविता शर्मा, तहसीलदार रेनवाल