
राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता और बहरोड़ से विधायक डॉ. जसवंत सिंह यादव का रविवार 8 नवंबर 2026 को जयपुर में निधन हो गया। वे 73 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर फैलते ही उनके समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने डॉ यादव के निधन पर शोक जताया है। इसी कड़ी में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने भी एक भावुक शोक संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने डॉ. जसवंत यादव के राजनीतिक और सामाजिक योगदान का ज़िक्र किया।
पूर्व सीएम राजे ने शोक संदेश में लिखा, "पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद एवं बहरोड़ विधायक श्री डॉ. जसवंत यादव जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद एवं पीड़ादायक है। डॉ. जसवंत यादव जी ने अपने लंबे राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन में जनसेवा को सर्वोपरि रखते हुए क्षेत्र के विकास और जनकल्याण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। जनहित के प्रति उनका समर्पण और जनता से उनका जुड़ाव सदैव स्मरणीय रहेगा। उनका निधन भाजपा परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों को इस असीम दुख को सहन करने की शक्ति दें। ॐ शांति!"
गौरतलब है कि डॉ. जसवंत सिंह यादव को राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे का सबसे भरोसेमंद, वफादार और मजबूत राजनीतिक सिपहसालार माना जाता था।
राजस्थान की राजनीति में अलवर और बहरोड़ के 'टाइगर' नाम से मशहूर डॉ. जसवंत यादव और वसुंधरा राजे का राजनीतिक संबंध वफादारी की मिसाल रहा है। राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि डॉ. जसवंत यादव के राजनीतिक कद को स्थापित करने में वसुंधरा राजे की अहम भूमिका रही है।
वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत मिलने के बाद वसुंधरा राजे ने जसवंत यादव के राजनीतिक प्रभाव और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें अपनी कैबिनेट में श्रम, नियोजन एवं कौशल विकास मंत्री जैसा महत्वपूर्ण विभाग सौंपा। वे पूरे 5 साल तक राजे कैबिनेट के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने गए।
राजस्थान भाजपा में जब-जब संगठन या गुटबाजी को लेकर रस्साकशी हुई, डॉ. जसवंत यादव हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहकर पूरी ताकत से वसुंधरा राजे के पक्ष में खड़े दिखाई दिए। अलवर-भरतपुर (मत्स्य क्षेत्र) में वसुंधरा राजे की राजनीतिक जमीन को मजबूत और सुरक्षित रखने की कमान जसवंत यादव के मजबूत कंधों पर ही थी।
साल 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान बहरोड़ में आयोजित एक विशाल नामांकन सभा का किस्सा आज भी राजनीतिक गलियारों में याद किया जाता है। जब वसुंधरा राजे मंच पर मौजूद थीं, तब जसवंत यादव की बहू ने मंच पर आकर वसुंधरा राजे के पैर छुए और बेहद भावुक होकर परिवार के लिए आशीर्वाद मांगा।
वसुंधरा राजे ने भी मंच से माइक संभालते हुए जसवंत यादव को अपना 'पुराना, सच्चा और भरोसेमंद भाई' बताते हुए जनता से उन्हें जिताने की भावुक अपील की थी, जिसके बाद वे चौथी बार विधानसभा पहुंचे थे।
साल 2018 में जब अलवर लोकसभा सीट पर उपचुनाव की स्थिति आई, तो तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपनी प्रतिष्ठा के दांव पर लगे इस चुनाव में अपने सबसे भरोसेमंद मोहरे डॉ. जसवंत यादव को मैदान में उतारा था। हालांकि, उस चुनाव में जसवंत यादव को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रचार के दौरान वसुंधरा राजे ने खुद अलवर में कई दिनों तक डेरा डालकर कैंपेन की कमान संभाली थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डॉ. जसवंत सिंह यादव के असमय चले जाने से वसुंधरा राजे ने राजस्थान के पूर्वी और मत्स्य अंचल (अलवर-कोटपूतली क्षेत्र) में अपना सबसे भरोसेमंद राजनीतिक आधार स्तंभ खो दिया है, जिसकी भरपाई होना बेहद कठिन है।