जयपुर

Rajasthan Water Crisis: पाताल में पहुंचा पानी! राजस्थान के कई इलाकों में भू-जल लगभग समाप्त

Rajasthan Groundwater: जयपुर-जोधपुर सहित देश के कई बड़े शहरों में भू-जल का स्तर बेहद जोखिमपूर्ण स्थिति में पहुंच गया है।

2 min read
Apr 06, 2026
Photo: AI generated

जयपुर। जयपुर-जोधपुर सहित देश के कई बड़े शहरों में भू-जल का स्तर बेहद जोखिमपूर्ण स्थिति में पहुंच गया है। आइआइटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 54 प्रमुख शहरों पर किए गए अध्ययन में इस गंभीर खतरे के प्रति आगाह किया है।

हाल ही सामने आई स्टडी रिपोर्ट के अनुसार, 1996 से 2023 के बीच इन 54 में से 23 शहरों में भू-जल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। उत्तर और मध्य भारत के शहरों में यह गिरावट -0.12 से -0.45 मीटर प्रति वर्ष की दर से हो रही है। दिल्ली, जयपुर और जोधपुर को बेहद जोखिमपूर्ण श्रेणी में रखा गया है।

ये भी पढ़ें

Rajasthan New Rail Track:100KM तक बिछेगी नई रेल लाइन, 374.70 करोड़ आएगी लागत; 10 स्टेशन भी बनेंगे

दूसरी ओर केंद्रीय भू-जल बोर्ड ने जोरदार बारिश के कारण पिछले साल जयपुर के भू-जल स्तर में सुधार का दावा किया गया है। आइआइटी के अध्ययनकर्ताओं का आकलन है कि यदि भू-जल दोहन और जलवायु परिवर्तन की यही स्थिति बनी रही, तो साल 2050 तक करीब 55 करोड़ शहरी भारतीयों के लिए पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

राजस्थान के कई इलाकों में भू-जल लगभग समाप्त

जयपुर- झोटवाड़ा और जगतपुरा में पानी खत्म होने के करीब जयपुर में भू-जल दोहन की दर 341 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। झोटवाड़ा, मुरलीपुरा और जगतपुरा जैसे इलाकों में भू-जल लगभग समाप्त हो रहा है। पानी की मांग हर साल 10 प्रतिशत बढ़ रही है। लोगों को मानक 135 लीटर के मुकाबले केवल 100-120 लीटर पानी ही मिल रहा है।

जोधपुर-मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतरः जोधपुर शहर इंदिरा गांधी नहर पर निर्भर है, लेकिन यहां भी रोजाना 80 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की कमी बनी हुई है। शहर की औसत जरूरत 520 एमएलडी है, जबकि उपलब्धता केवल 440 एमएलडी है। शासन ने 225 वर्ग मीटर से बड़े भूखंडों पर 'वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर अनिवार्य कर दिया है, जिसके बिना नया पानी कनेक्शन नहीं दिया जाता।

कोटा-चंबल का सहारा: कोटा में चंबल नदी मुख्य स्रोत है, जिससे प्रति व्यक्ति 240 लीटर तक पानी मिल रहा है। हालांकि, टेल क्षेत्रों में कम प्रेशर की समस्या है।

जोखिम का स्तर

1. बेहद जोखिमपूर्णः जयपुर, जोधपुर, जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, चंडीगढ़, सहारनपुर, वडोदरा और मुंबई।
2. संकटग्रस्तः कोटा, रायपुर, दिल्ली, आगरा, लखनऊ, वाराणसी, बरेली, कोलकाता, पुणे, बेंगलूरु और हैदराबाद।

संकट के कारण

अत्यधिक दोहनः बढ़ती आबादी की जरूरतों के लिए जमीन से पानी तो निकाला जा रहा है, लेकिन उसे रिचार्ज करने के प्राकृतिक रास्ते बंद हो रहे हैं।

शहरीकरणः पक्की सड़कों और इमारतों (कंक्रीट) के कारण बारिश का पानी जमीन के नीचे नहीं जा पा रहा है। शहरों की आबादी 2.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जो राष्ट्रीय औसत (1.64 प्रतिशत) से अधिक है।

जलवायु परिवर्तनः तापमान बढ़ने से की कम हो रही और वाष्पीकरण बढ़ रहा है।

ये भी पढ़ें

Jaipur Traffic Update: जयपुर में यहां सड़क चौड़ी होते ही बदल गई तस्वीर, इन रूट्स पर सफर हुआ आसान

Updated on:
06 Apr 2026 07:59 am
Published on:
06 Apr 2026 07:38 am
Also Read
View All

अगली खबर