रिसीवर प्रतिनिधि भी दस्तावेज गायब करने का आरोप लगा चुके हैं। इसमें पूर्व राजघराने की अरबों की विवादित सम्पत्ति व राजस्थान विलय के दस्तावेज गायब होने के आरोप लगाए थे।
राजमहल होटल से सटी इमारत में रखे दस्तावेजों की सूची तैयार करने के मामले में बुधवार शाम नया मोड़ आ गया। दस्तावेजों की सूची बनाने पहुंचे जेडीए अफसरों के समक्ष एसएमएस इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधियों ने शर्त रख दी।
उन्होंने कहा, कमरे में रखी फाइलों का एक-एक पेज गिनाकर सूची बनाएं। इस पर जेडीए अफसर परेशान हो गए। देर तक बातचीत के जरिए मनाने का प्रयास करते रहे। बात नहीं बनी तो दो टूक कह दिया, यह संभव नहीं है।
ऐसे तो सूची बनाने में 4-5 महीनप्रभावित पक्ष को दस्तावेजों से छेड़छाड़ का अंदेशा है। इसी कारण वे फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित रिसीवर कार्यालय भी यहीं संचालित था, जिसे भी जेडीए ने सील कर दिया था।
रिसीवर प्रतिनिधि भी दस्तावेज गायब करने का आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने 26 अगस्त को अशोकनगर थाने में एफआईआर दर्ज कराने के लिए शिकायत दी थी।
इसमें पूर्व राजघराने की अरबों की विवादित सम्पत्ति व राजस्थान विलय के दस्तावेज गायब होने के आरोप लगाए थे।
जेडीए ने मंगलवार को सील खोली थी। जिस गेट पर सील लगाई गई, उसका निचला एक हिस्सा टूटा हुआ था। वहां मौजूद लोगों का कहना था कि सील करने के दौरान यह गेट बिल्कुल सही था।
हालांकि जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट ने सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं, इसमें एक-एक पेज गिनाने का जिक्र नहीं है। लेकिन, कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधि व उनके वकील नहीं माने।
ऐसे में मामला अब हाईकोर्ट में ही पहुंचता नजर आ रहा है। दोनों पक्षों ने साफ कह दिया है कि बात नहीं बनी तो 15 फरवरी को होने वाली सुनवाई में अपना पक्ष रखेंगे।
इसके बाद दोनों ही पक्ष बैरंग लौटे। अब न्यायालय के आदेश के बाद ही कार्यवाही हो सकेगी।