
जयपुर . सरकार के कामकाज गिनाने के लिए भाजपा ने मंत्रियों-विधायकों को अपने गृहक्षेत्र में जाने को कहा है लेकिन ये दौरे पार्टी और नेताओं के लिए ही उलटे पड़ रहे हैं। कार्यकर्ताओं ने एेसा आइना दिखाया कि ज्यादातर मंत्रियों-विधायकों के लिए क्षेत्र में घूमना ही भारी पड़ रहा है। कई विधायकों को तो कार्यकर्ताओं ने यहां तक कह दिया कि सवा चार साल बाद अब क्या करने आए हो?
कार्यकर्ता नाराज नहीं
प्रदेश कार्यालय प्रभारी मुकेश चेलावत ने कहा की कार्यकर्ता नाराज नहीं हैं, उदासीन कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए विशेष प्रवास की योजना बनाई है। इसके तहत सरकार के विकास के कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
ऐसे झेलना पड़ रहा रोष-असन्तोष, कहा-सुधर जाओ वरना भुगतना पड़ेगा नतीजा
संसदीय सचिव और विधायक कैलाश वर्र्मा अपने क्षेत्र में गए तो कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब क्यों आए हो? इतने साल से कहां थे? लोगों ने सड़क और पानी जैसी समस्याएं उठाई और कहा कि जीतने के बाद एक बार भी नहीं आए।
गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया बैठक लेने कोटा गए तो कार्यकर्ताओं ने कह दिया कि 4 साल में पुराने कार्यकर्ताओं के कितने छाले पड़ गए, कोई देखने नहीं आया। अब जब चुनाव आए तो बातचीत करने आ गए? उदयपुर में भी कटारिया को खरी-खरी सुननी पड़ी। ऐसे में उन्होंने दौरे ही बंद कर दिए और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें करने लगे।
सांसद रामचरण बोहरा ने बाड़मेर में जिले की बैठक ली तो कार्यकर्ताओं ने जन प्रतिनिधियों के प्रति आक्रोश जताते हुए यहां तक कह दिया कि सुधर जाओ वरना चुनाव में नतीजा भुगतना पड़ेगा। कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी को सिरोही में बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं ने कहा कि पूरे जिले में ही परिवर्तन जरूरी है, अन्यथा भाजपा की स्थिति खराब हो जाएगी। जैतारण में मंत्री सुरेन्द्र गोयल को लेकर कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताई।
नवलगढ़ में हुई बैठक में सार्वजनिक निर्माण मंत्री युनूस खान के सामने जिलाध्यक्ष को लेकर जमकर नाराजगी जताई गई। जयपुर में प्रदेश प्रभारी विद्याधरनगर विधानसभा की बैठक लेने पहुंचे तो कार्यकर्ताओं ने कहा कि सत्ता और संगठन में आम व्यक्ति की सुनवाई ही बंद हो गई है। संगठन तो विधायकों के हाथों की कठपुतली बन कर रह गया है।