Gold and Silver Crash: इतिहास में पहली बार 19 जनवरी को चांदी के दाम 3 लाख रुपए पार पहुंचे थे। वहीं, 10 दिन बाद चांदी के दामों में इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
जयपुर। चांदी के भाव 7वें आसमान पर पहुंचने के बाद अब धड़ाम से नीचे आ गिरे हैं। इतिहास में पहली बार 19 जनवरी को चांदी के दाम 3 लाख रुपए पार पहुंचे थे। इसके बाद लगातार तेजी का दौर जारी रहा और 29 जनवरी तक चांदी 4.20 लाख रुपए प्रति किलो के अपने अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन, रिकॉर्ड बनाने के अगले ही दिन सोना—चांदी के मार्केट में बड़ा उलटफेर देखने को मिला। एक ही दिन में चांदी के दाम 1 लाख 28 हजार रुपए प्रति किलो तक टूट गए, जिससे निवेशकों और कारोबारियों में खलबली मच गई।
भारतीय वायदा बाजार एमसीएक्स पर एक दिन में ही चांदी अपने ऑल टाइम हाई 4.20 लाख रुपए प्रति किलो से 1,28,000 रुपए टूटकर 2.91 लाख पर आ गई। मुनाफा वसूली से इंटाडे में ही शुक्रवार को इसकी कीमतें 27 प्रतिशत यानी 1.08 लाख रुपए से ज्यादा घट गई। सोना भी अपने रेकॉर्ड हाई 1.80 लाख रुपए से 33,000 रुपए टूटकर 1.49 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि चांद पर पहुंची चांदी 10 दिन बाद ही जमीन पर कैसे आ गई? आखिर क्या वजह रही कि एक ही दिन में चांदी के दामों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली।
सर्राफा बाजार में सोना-चांदी का कारोबार पूरी तरह सट्टेबाजी के असर में चल रहा था। कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव के चलते हालात इतने अस्थिर हो गए थे कि ज्वेलर्स भी काम करने से डरे हुए थे। जिसके चलते व्यापार पर काफी असर पड़ा। हालांकि, अब चांदी के दाम कम होने से व्यापार फिर से पटरी पर लौटने की आस जगी है।
-सरस शर्मा, सर्राफा व्यापारी, जयपुर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जेरोम पावेल की जगह केविन वार्श को फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन के रूप में नामित किया है। ऐसे में अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ और सोने-चांदी के भाव लुढ़क गए। लेकिन, चांदी के दाम बढ़ने और कम होने से ज्वेलर्स का व्यापार प्रभावित हुआ है। 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश होने वाला है। ऐसे में माना जा रहा है कि व्यापारियों को थोड़ी राहत देने की कोशिश की गई है। बजट के अगले दिन फिर से चांदी के दामों में उछाल देखने को मिल सकता है।
-हनुमान लाल सोनी, ज्वेलर्स, जालोर
इंटरनेशनल सटोरिया मार्केट की वजह से सर्राफा कारोबार को बड़ा झटका लगा है। सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव तय सीमा में होना चाहिए, लेकिन सट्टा मार्केट की वजह से ज्वेलर्स को काफी नुकसान पहुंचा है। चांदी के दाम गिरने से व्यापारियों के साथ-साथ उन लोगों को भी काफी नुकसान हुआ है, जिन्होंने सट्टा मार्केट में निवेश किया। ऐसा लगता है कि सर्राफा कारोबार में कुछ लोगों का दबदबा कायम करने के लिए छोटे व्यापारियों को किनारे करने की कोशिश की जा रही है।
-रामरज गोयल, सर्राफा व्यापारी, जयपुर
चांदी की कीमतों में इस आग की सबसे बड़ी वजह सप्लाई और डिमांड के बीच का वो गड्ढा है जिसे भरना फिलहाल नामुमकिन लग रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया लगातार पांचवें साल चांदी की संरचनात्मक कमी का सामना कर रही है। इसे ऐसे समझिए कि खदानों से जितनी चांदी निकल रही है, मांग उससे 30 करोड़ औंस ज्यादा है।
पेरू: 93,000 टन
ऑस्ट्रेलिया: 88,000 टन
रूस: 72,000 टन
चीन: 41,000 टन
मेक्सिको: 37,000 टन