
हिण्डौनसिटी. शिवजी की साधना के माह श्रावण के मंगलवार को किया जाने वाला मंगला गौरी व्रत विवाहित स्त्रियों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। साथ ही कन्याओं को श्रेष्ठ वर की प्राप्ति की मनौती से पूर्ण करता है। परंपरा के अनुसार सावन मास में प्रत्येक मंगलवार को यह व्रत किया जाता है। पंडित मिथलेश शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष पहला व्रत 4 अगस्त को पड़ रहा है। इस सावन माह में यह व्रत 11, 18, 25 अगस्त को किया जाएगा।
परिवार में सुख-शांति:
मंगला गौरी के व्रत का सबसे बड़ा महत्व परिवार में सुख-शांति बनाए रखना है। मान्यता है कि माता मंगल गौरी की कृपा से गृहस्थ जीवन में कलह और बाधाएं दूर होती हैं। पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास मजबूत होता है तथा संतान सुख की प्राप्ति होती है।
धर्मलाभ
धर्मशास्त्रों में इसे स्त्रियों के लिए विशेष रूप से फलदायी बताया गया है। श्रद्धा और भक्ति से किया गया व्रत पापों का क्षय करता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि मंगला गौरी व्रत से मोक्ष मार्ग भी प्रशस्त होता है।
पूजा विधान:
प्रात: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना, घर या मंदिर में मंगला गौरी माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करना, दीपक जलाकर पूजा करना और फूल, अक्षत, रोली, चंदन अर्पित करना शामिल है। विशेष रूप से पान, सुपारी, लौंग, इलायची और मिठाई का भोग लगाया जाता है। संध्या समय व्रत कथा का श्रवण कर आरती की जाती है और व्रत का समापन होता है।
पौराणिक महत्ता:
स्कंद पुराण व भविष्योत्तर पुराण के अनुसार माता गौरी ने इस व्रत से शिवजी को पति रूप में प्राप्त किया था। इसी कारण यह व्रत स्त्रियों के लिए पति की दीर्घायु और परिवार की रक्षा हेतु संकल्पित है। इसे सौभाग्य और समृद्धि का व्रत माना जाता है।
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हिण्डौनसिटी. पंडित मिथलेश शास्त्री