Patrika Foundation Day: 2030 का जयपुर केवल स्मार्ट सिटी ही नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित और अवसरों से भरपूर शहर होगा।
जयपुर। 2030 का जयपुर केवल स्मार्ट सिटी ही नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए भरोसेमंद, सुरक्षित और अवसरों से भरपूर शहर होगा। जयपुर में स्मार्ट सेफ्टी ऐप, पिंक पेट्रोलिंग का विस्तार, 2030 सीसीटीवी युक्त सुरक्षित पब्लिक स्पेस, महिला नेतृत्व को बढ़ावा और महिला स्टार्टअप्स के लिए मजबूत फंडिंग, ये सभी पहल मिलकर मेलकर एक ऐसा भविष्य रचने की क्षमता रखती हैं, जहां तकनीक, पुलिसिंग, नीति और समाज एक साथ महिलाओं को बराबरी, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का भरोसा देंगे। इसको लेकर आज और भविष्य के जयपुर को देखें…।
मोबाइल की स्क्रीन टच करते ही अगर पुलिस कंट्रोल रूम को आपकी लोकेशन दिखने लगे और कुछ ही मिनटों में मदद पहुंच जाए तो यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि 2030 के सुरक्षित जयपुर का विजन है। महिला सुरक्षा को तकनीक से जोड़ते हुए 'राजकॉप सिटीजन' ऐप को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी हैं। इस ऐप में 'नीड हेल्प' फीचर जोड़ा गया है, जिसमें इमरजेंसी और नॉन-इमरजेंसी दोनों तरह की सेवाएं उपलब्ध हैं।
एसओएस विकल्प के जरिए फोटो और वीडियो रिकॉर्ड कर सीधे पुलिस को भेजे जा सकते हैं। अलर्ट बटन दबाते ही पुलिस कंट्रोल रूम को महिला के संकट में होने की सूचना के साथ लोकेशन मिलती है। कई मामलों में कुछ मिनटों में पुलिस सहायता उपलब्ध हो रही है। ऐप से महिलाओं को जोड़ने की जरूरत है।
साल 2030 तक स्मार्ट सेफ्टी ऐप को और अधिक उन्नत बनाते हुए इसमें कई आधुनिक फीचर जोड़े जा सकते हैं। ऐप में एआइ आधारित डेंजर अलर्ट सिस्टम होगा, जो संदिग्ध गतिविधि पर स्वतः चेतावनी भेजेगा। सेफ रूट नेविगेशन महिलाओं को सुरक्षित रास्ता सुझाएगा, जबकि एसओएस दबाते ही ऑटो ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू हो जाएगी। स्मार्ट वॉच या पैनिक बैंड जैसे वियरेबल डिवाइस से सीधा कनेक्शन संभव होगा, ताकि मोबाइल निकाले बिना अलर्ट भेजा जा सके।
2030 का विजन एक ऐसे शहर का है, जहां महिलाएं दिन ही नहीं, रात में भी बिना भय के घर से निकल सकें। सुरक्षित पब्लिक स्पेस केवल सुविधाओं का सवाल नहीं, बल्कि भरोसे का माहौल तैयार करने की जिम्मेदारी है। इसी दिशा में पार्क, बस स्टॉप, बाजार, मॉल, पर्यटन स्थल और प्रमुख चौराहों पर हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, बेहतर रोशनी और इमरजेंसी हेल्प कियोस्क लगाने की योजना होनी चाहिए। लक्ष्य है कि 2030 तक 100 प्रतिशत प्रमुख सार्वजनिक स्थान कैमरों की निगरानी में हों और 80 प्रतिशत बस स्टॉप पर हेल्प कियोस्क उपलब्ध हों।
राजस्थान में महिला उद्यमिता लगातार बढ़ रही है, लेकिन पूंजी और मार्गदर्शन की कमी अब भी बड़ी चुनौती है। वर्तमान में महिलाओं को केंद्र और राज्य स्तर पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहयोग मिल रहा है। अभी महिलाओं को मुख्य रूप से आईस्टार्ट राजस्थान के तहत सपोर्ट मिलता है। प्री-सीड स्टेज पर 2.4 लाख रुपए का आइडिएशन ग्रांट मिलता है, जिसमें 50% से ज्यादा इक्विटी वाली महिला फाउंडर्स को अतिरिक्त 60 हजार रुपए का बूस्टर मिलता है। सीड स्टेज पर क्यूरेट स्कोर के आधार पर 10 लाख रुपये तक वायबिलिटी ग्रांट संभव है।
वर्तमान सुविधाएं सीमित हैं ग्रांट छोटे स्तर की, लोन प्रक्रिया जटिल और ग्रामीण पहुंच कम। 2030 लक्ष्य हासिल करने के लिए फंड को 500 करोड़ से बढ़ाकर 1,000 करोड़ किया जाए। हर जिले में 'वीमेन बिजनेस हब' स्थापित हों, जहां कोलैटरल-फ्री लोन, डिजिटल ट्रेनिंग और ई-कॉमर्स लिंकिंग हो। कॉलेजों में स्टार्टअप क्लब्स अनिवार्य हों, जिसमें स्किल और मार्केटिंग कोर्स शामिल हों। जीरो गारंटी लोन सुनिश्चित करें। रूरल-टियर-2 शहरों को प्राथमिकता दें।
2030 का विजन केवल तकनीकी सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सड़कों पर दिखने वाला भरोसा भी उतना ही जरूरी है। इसी सोच के साथ पिंक पेट्रोल को राजधानी के हर प्रमुख क्षेत्र तक विस्तारित करने की योजना तैयार की गई है। वर्तमान में सीमित रूट्स पर संचालित पिंक पेट्रोल को 2030 तक 50 से अधिक प्रमुख मार्गों, बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
महिला सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों की संख्या 1000 से अधिक की जाएगी। स्कूल, कॉलेज, कोचिंग हब, बाजार और आइटी सेक्टर क्षेत्रों के आसपास नियमित गश्त सुनिश्चित की जाएगी। खासतौर पर रात 8 बजे के बाद संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी और मोबाइल पेट्रोलिंग बढ़ाई जाएगी, ताकि कामकाजी महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षित माहौल मिल सके।
महिला हेल्प डेस्क और पिंक पेट्रोल के बीच सीधा डिजिटल संपर्क स्थापित किया जाएगा, जिससे शिकायत मिलते ही नजदीकी गश्ती दल तुरंत मौके पर पहुंचे। लक्ष्य है कि 24 गुना 7 पिंक पेट्रोल यूनिट सक्रिय रहे और 2030 तक छेड़छाड़ व सार्वजनिक उत्पीड़न के मामलों में कमी लाई जा सके। इसे और बेहतर बनाने के लिए जीपीएस ट्रैकिंग, बॉडी कैमरा, कम्युनिटी पुलिसिंग और स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान जोड़े जा सकते हैं। स्थानीय बाजार संघों और रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी के साथ समन्वय कर सेफ जोन घोषित क्षेत्र बनाए जा सकते हैं।
2030 तक भारत और राजस्थान में महिलाओं की भागीदारी को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा, कौशल विकास, सुरक्षित कार्यस्थल, नीतिगत सुधार और सामाजिक जागरूकता पर फोकस जरूरी है। केंद्र सरकार ने महिला श्रम बल भागीदारी दर वित्त वर्ष 2024 के 41.7% से बढ़ाकर 2030 तक 55% करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें समान वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल, सस्ती बाल देखभाल और देखभाल अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाना शामिल है। राजस्थान में यह प्रगति तेज है। 2017-18 के 27% से 2023-24 में 50.9% पहुंच गई और राज्य कौशल नीति 2025 तथा रोजगार नीति 2026 के तहत 60% से अधिक लक्ष्य है। स्कूलों में लड़कियों का नामांकन बढ़ाने व शैक्षणिक निरंतरता के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नई शिक्षा नीति और 'मंजिल' जैसी योजनाएं अहम है। राजनीति में नारी शक्ति वंदन अधिनियम से 33% आरक्षण लागू होने से नेतृत्व बढ़ेगा। स्थानीय स्तर पर 50% पहले से प्रभावी है।
कॉर्पोरेट और बिजनेस में पूर्वाग्रह दूर करने, मेंटरशिप, हाइब्रिड मॉडल, पितृत्व अवकाश और महिला केंद्रित भर्ती से प्रगति संभव है। राजीविका के माध्यम से लखपति दीदी बनाना, डिजिटल साक्षरता (फ्री मोबाइल योजना) और सुरक्षित परिवहन बढ़ाएं। सामाजिक स्तर पर सांस्कृतिक मानदंड बदलने के लिए पुरुषों को घरेलू जिम्मेदारियां साझा करने और जागरूकता अभियान चलाएं।
स्मार्ट स्ट्रीट लाइट्स को सेंसर आधारित बनाया जाए, जो अंधेरा बढ़ते ही स्वतः तेज रोशनी दें। बस, मेट्रो और टैक्सी में पैनिक बटन, जीपीएस ट्रैकिंग, सीसीटीवी अनिवार्य हों। महिलाओं की प्रमुख मांग सुरक्षित और सत्यापित कैब सेवा, हाईवे पर इमरजेंसी पैनिक बटन, सुनसान इलाकों में पुलिस पेट्रोलिंग और रियल टाइम हेल्पलाइन रिस्पॉन्स की है। रात में काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित पिक-अप और ड्रॉप सुविधा जरूर हो। इन उपायों से 2030 तक रात्रि के दौरान होने वाले अपराधों में 40% तक कमी लाई जाए।
-ममता शर्मा सामाजिक कार्यकर्ता