7 मार्च 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अमृत महोत्सव विजन 2030: जटिल से जटिल बीमारी का इलाज जयपुर में ही हो, ‘रिफरल’ नहीं, ‘रिजॉल्यूशन सिटी’ चाहिए

अमृत महोत्सव विजन 2030 के तहत जयपुर को ऐसा हेल्थ हब बनाने का लक्ष्य है, जहां जटिल से जटिल बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो। उद्देश्य यह है कि मरीजों को रिफरल के लिए भटकना न पड़े और जयपुर ‘रिफरल सिटी’ नहीं, बल्कि ‘रिजॉल्यूशन सिटी’ के रूप में विकसित हो।

3 min read
Google source verification

जयपुर

image

Arvind Rao

Mar 07, 2026

Amrit Mahotsav Vision 2030 Jaipur Aims to Become Resolution City Ensuring Advanced Treatment for Complex Diseases

Amrit Mahotsav Vision Jaipur Healthcare

जयपुर: जब घर का कोई सदस्य बीमार होता है तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है, क्या इलाज समय पर मिल पाएगा? क्या डॉक्टर उपलब्ध होंगे? क्या जांच और सर्जरी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ेगा? क्या बड़े शहरों का रुख करना पड़ेगा?

साल 2030 का जयपुर ऐसा हो, जहां इलाज के लिए लंबी कतारें नहीं, बल्कि सुलभ और आधुनिक सुविधाएं हों। राजधानी का स्वास्थ्य ढांचा केवल इमारतों का नहीं, बल्कि भरोसे का विस्तार हो। सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं से लेकर टेलीमेडिसिन और आपातकालीन रिस्पांस तक…यह विजन हर नागरिक की सुरक्षा से जुड़ा है।

राजस्थान के कोने-कोने से गंभीर मरीज जयपुर का रुख करते हैं। ऐसे में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर केवल किसी एक शहर का विषय नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की जीवन रेखा है। अमृत महोत्सव के इस अवसर पर सवाल है, क्या 2030 तक जयपुर इलाज के लिए 'रिफरल सिटी' नहीं, बल्कि 'रिजॉल्यूशन सिटी' बन पाएगा?

सुपर स्पेशियलिटी विस्तार: राजधानी में ही मिले जटिल बीमारियों का उपचार

जयपुर लंबे समय से राजस्थान की चिकित्सा राजधानी भी रहा है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध अस्पतालों पर प्रदेशभर के मरीजों का भरोसा टिका है। यहां प्रतिदिन औसतन 8-10 हजार (ओपीडी) मरीज आते हैं और सालाना हजारों जटिल सर्जरी होती हैं।

आज भी कई मरीजों को हार्ट, न्यूरो या कैंसर के जटिल मामलों में राज्य से बाहर जाना पड़ता है। विजन 2030 का लक्ष्य स्पष्ट है जटिल से जटिल बीमारी का इलाज जयपुर में ही उपलब्ध हो।

विस्तार की जरूरत

  • न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और ट्रॉमा केयर में 50 प्रतिशत फैकल्टी वृद्धि।
  • हर प्रमुख विभाग में दो अतिरिक्त मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और हाई-एंड आइसीयू बेड।
  • 22 मंजिला नए आईपीडी टावर में रोबोटिक सर्जरी और एडवांस 3 टेस्ला एमआरआई, पेट-सीटी जैसी तकनीक।

जिला अस्पतालों से ई-रेफरल प्रणाली

पहले बाहर रेफर, अब जयपुर में इलाज

क्या है 2030 का लक्ष्य?

  • हार्ट सर्जरी के लिए महानगरों पर निर्भरता खत्म।
  • अत्याधुनिक कार्डियक ब्लॉक, 24 घंटे कैथ लैब।
  • मल्टी-लेवल ट्रॉमा नेटवर्क।
  • प्रतीक्षा सूची समाप्त, डिजिटल अपॉइंटमेंट।

मिसाल बनेगा आईपीडी टावर, सुविधाएं, पहचान और ताकत तीनों बढ़ेंगी

एसएमएस अस्पताल में बन रहे आईपीडी टावर में विश्व स्तरीय अत्याधुनिक सुविधाएं मिलेंगी। यहां ओपीडी की सुविधा भी रहेगी। मरीजों के लिए इमरजेंसी बेड भी उपलब्ध रहेंगे। इससे इमरजेंसी हालत में उन्हें तुरंत उपचार मिल सकेगा।

यहां सीटी एमआरआई, कार्डियक डायग्नोसिस, हिमेटोलोजी इत्यादि जांचों की सुविधा भी मिलेगी। ओपीडी में दिखाने के बाद जांचों के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और एक ही छत के नीचे तमान सुविधाएं मिल सकेंगी।

टेलीमेडिसिन: गांव बैठे विशेषज्ञ से परामर्श-2030 का रोडमैप

  • ई-कंसल्टेशन प्लेटफॉर्म: 200 से अधिक पीएचसी कनेक्टेड
  • ई-आईसीयू नेटवर्क: 50 जिला, उप जिला अस्पताल
  • डिजिटल डायग्नोस्टिक कियोस्कः हर ब्लॉक में कम से कम एक
  • मोबाइल हेल्थ यूनिटः 100 वाहन
  • मेडिकल कॉलेज अपग्रेड: मेडिकल एजुकेशन से हेल्थ क्वालिटी तक, 'क्या हमारे डॉक्टर विश्वस्तरीय प्रशिक्षण पा रहे हैं?'
  • स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टॉफ की दक्षता पर निर्भर करती है। ये स्वास्थ्य विभाग के साथ ही प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था की मुख्य धुरी हैं।
  • मौजूदा एमबीबीएस सीटें (जयपुर प्रमुख संस्थान- 250-300)
  • सीटों में बढ़ोतरी की जरूरत- 30% एमबीबीएस में
  • पीजी में 25%

सिमुलेशन लैब रिसर्च विंग

  • वर्तमान में सीमित हाई-फिडेलिटी सिमुलेशन, 2030 तक हर विभाग में डिजिटल सिमुलेशन सेटअप
  • नर्सिंग-पैरामेडिकल अपग्रेड
  • आइसीयू स्पेशलाइजेशन, ग्रामीण सेवा आधारित ट्रेनिंग मॉड्यूल
  • 1:4 से 1:2 फैकल्टी-स्टूडेंट अनुपात करने का लक्ष्य 2030 तक

गंभीर बीमारियों के लिए समर्पित संस्थान

  • एडवांस लीनियर एक्सीलरेटर से रेडियोथैरेपी
  • डे-केयर कीमो यूनिट
  • अत्याधुनिक कैथ लैब
  • बायपास-एंजियोप्लास्टी

40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लिए स्क्रीनिंग अभियान

  • 25% हृदय रोग से जुड़ी मृत्यु दर
  • 70,000 से अधिक कैंसर के वार्षिक मामले राजस्थान में
  • 10 लाख से अधिक लाभान्वित मरीज वार्षिक (सरकारी योजनाओं से)

सर्वाइवर स्टोरी

जयपुर की 45 वर्षीय सुनीता (बदला नाम) को ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। समय पर स्क्रीनिंग-उपचार से वह स्वस्थ हैं। वह कहती हैं…जांच में देर से शायद जिंदा नहीं होती।