
Rajasthan Womens Reservation : एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच के विश्लेषण में राजनीति में महिला आरक्षण का एक कड़वा सच सामने आया है। 2023 महिला आरक्षण बिल में 33% आरक्षण की बात कही है। पर राजस्थान में अगर देखें तो भाजपा-कांग्रेस टिकट देने में इस बिल बहुत दूर नजर आते हैं। आंकड़ों को देखें तो राजस्थान में विधानसभा और लोकसभा के चुनावी मैदान में केवल 9.8 प्रतिशत महिलाओं को उम्मीदवार बनाया गया है।
संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के उद्देश्य से सितंबर 2023 में पारित महिला आरक्षण विधेयक को ऐतिहासिक कदम माना गया था, लेकिन इसके बाद हुए चुनावों के आंकड़े राजनीतिक दलों की वास्तविक प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े करते हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच के विश्लेषण के अनुसार, विधेयक के बाद हुए लोकसभा और विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में महिलाओं को टिकट देने का आंकड़ा 10 फीसदी के आस-पास ही सिमटा रहा।
विश्लेषण में शामिल लोकसभा चुनाव 2024 और 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभा चुनावों में कुल 39,789 उम्मीदवारों में केवल 4,073 महिलाएं थीं। यानी महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी महज 10.2 प्रतिशत रही। यह आंकड़ा महिला आरक्षण विधेयक की भावना और 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व के लक्ष्य से काफी दूर है।
लोकसभा चुनाव 2024 में कुल 8,360 उम्मीदवारों में से केवल 800 महिलाएं थीं, जो कुल उम्मीदवारों का 9.6 प्रतिशत है। 543 लोकसभा सीटों में से 152 सीटें ऐसी रहीं जहां किसी भी दल ने महिला उम्मीदवार नहीं उतारी। कांग्रेस और भाजपा जैसी राष्ट्रीय पार्टियों ने भी महिलाओं को 13 से 16 प्रतिशत के बीच ही टिकट दिए। हालांकि कुछ क्षेत्रीय दल अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करते नजर आए। नाम तमिलार काची ने 50 प्रतिशत, बीजू जनता दल ने 33 प्रतिशत और राष्ट्रीय जनता दल ने 29 प्रतिशत महिला उम्मीदवारों को टिकट दिए।
20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानसभा चुनावों में कुल 31,429 उम्मीदवारों में से 3,273 महिलाएं थीं। महिला उम्मीदवारों की हिस्सेदारी 10.2 प्रतिशत रही। किसी भी राज्य में महिला उम्मीदवारों का प्रतिशत 14 प्रतिशत से अधिक नहीं पहुंच सका।
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में महिलाओं को टिकट वितरण के लक्ष्य और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर था। आरक्षण का पेरोकार करने वाली दिग्गज पार्टियों को एक नजर में देखें।
भाजपा-
कुल 200 उम्मीदवारों में केवल 20 महिलाएं (-10 प्रतिशत)।
कांग्रेस-
199 सीटों पर 28 महिलाएं (-14 प्रतिशत)।
कुल महिलाएं -
सभी पार्टियों और निर्दलियों सहित करीब 183-189 महिलाएं मैदान में (कुल उम्मीदवारों में -9.76 प्रतिशत)।
नतीजा -
20 महिलाएं विधायक बनीं (9 भाजपा, 9 कांग्रेस, 2 निर्दलीय)। यह चुनाव 2018 (24 महिलाएं) से कम है। विधानसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व कभी 15 प्रतिशत से ऊपर नहीं गया।
भाजपा-
दीया कुमारी - विद्याधर नगर
अनिता भाडेल - अजमेर साउथ (SC)
डॉ. मंजू बाघमार - जायल (SC)
शोभा चौहान - सोजत
दीप्ति किरण माहेश्वरी - राजसमंद
कल्पना देवी - लाडपुरा
वसुंधरा राजे - झालरापाटन
सिद्धि कुमारी - बीकानेर ईस्ट
नौक्षम चौधरी - कामां
कांग्रेस-
शिमला देवी - अनूपगढ़ (SC)
सुशीला डूडी - नोखा
कुमारी रीता चौधरी - मंडावा
शिखा मील बाराला - चोमू
शोभा रानी कुशवाह - धौलपुर
अनिता जाटव - हिण्डौन (SC)
इंद्रा - बामनवास (ST)
गीता बारवार - भोपालगढ़ (SC)
रमीला खड़िया - कुशलगढ़ (ST)
निर्दलीय
डॉ. रितु बनावत - बयाना (SC)
प्रियंका चौधरी - बाड़मेर।
राज्य में 200 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव के लिए कुल 1,875 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से सिर्फ़ 9.76 प्रतिशत यानी 183 महिलाएं थी। यह आंकड़ा ऐसे राज्य के लिए चिंताजनक है जहां 2003 से महिलाओं के वोट शेयर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। बीते 4 चुनावों में महिला वोटरों की भागीदारी 10 प्रतिशत अंक बढ़ी है और चुनाव 2023 में 2.73 करोड़ पुरुष वोटरों के मुकाबले 2.52 करोड़ रजिस्टर्ड महिला वोटर थे। जिनमें 199 विधानसभा सीटों के लिए अंतिम मतदान प्रतिशत 75.45 प्रतिशत रहा। महिला मतदान 74.72 प्रतिशत और पुरुष मतदान 74.53 प्रतिशत दर्ज किया गया।
प्रदेश के पहले विधानसभा चुनाव 1952 में एक भी महिला विधायक नहीं बन पाई थीं। दूसरे चुनाव में 9 महिलाएं चुनी गई। इसके बाद हुए 2 विधानसभा चुनावों में महिला विधायकों की संख्या घटती गई और 1967 में चौथे विधानसभा चुनाव में महिला विधायकों की संख्या महज 6 रह गई।
2008 और 2013 में राजस्थान में सबसे ज्यादा 28-28 महिलाएं विधायक चुनी गई। 2003 में प्रदेश में पहली बार मुख्यमंत्री, राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर महिलाएं थीं। हालांकि इस साल विधानसभा में महिलाओं की संख्या केवल 12 थी। 2018 में 15वीं विधानसभा में महिला विधायकों की संख्या 2013 की तुलना में पांच फीसदी कम थी।
राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटें हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस ने कुल 8 महिलाओं को टिकट दिया था।
भाजपा - 5 महिलाएं
इंदु देवी जाटव - करौली-धौलपुर (SC)
प्रियंका बालन मेघवाल - श्रीगंगानगर (SC)
मंजू शर्मा - जयपुर (सामान्य)
ज्योति मिर्धा - नागौर (सामान्य)
महिमा कुमारी - मेवाड़ राजसमंद (सामान्य)।
कांग्रेस - 3 महिलाएं
संजना जाटव - भरतपुर (SC)
संगीता बेनीवाल - पाली (Pali)
उर्मिला जैन भाया - झालावार-बारां (Jhalawar-Baran)।
भारत की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी 49 प्रतिशत है, लेकिन वर्तमान लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व करीब 14 प्रतिशत ही है। वैश्विक स्तर पर स्थिति चिंताजनक है। अंतर-संसदीय संघ के अनुसार, राष्ट्रीय संसदों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मामले में भारत 185 देशों में 151वें स्थान पर है।