
जयपुर। दुनियाभर में 10 जून को विश्व नेत्रदान दिवस मनाया जाता है। नेत्रदान महादान कहलाता है। क्योंकि नेत्रहीन व्यक्तियों को जब कोई अपनी दृष्टि देता है और वह इस दुनिया को देख पाता है तो यह महादान कहलाता है। राजस्थान की बात करे तो पिछले कुछ सालों में लोगों में जागरूकता बढ़ी है। अब लोग आगे बढ़कर नेत्रदान करते है।
राजस्थान बैंक सोसायटी आफ राजस्थान की ओर से नेत्रदान कराया जाता है। पिछले 20 सालों में 12 हजार से ज्यादा लोगों को रोशनी मिली है। 19 हजार से ज्यादा नेत्रदान किए जा चुके है। लेकिन सोसायटी की ओर से 80 साल से ज्यादा उम्र के लोगों का कॉर्निया नहीं लिया जाता है। सोसायटी के अध्यक्ष बीएल शर्मा का कहना है कि डॉक्टर्स के अनुसार 80 से ज्यादा उम्र के लोगों का कॉर्निया ज्यादा उपयोगी नहीं होता है। ऐसे में यह कॉर्निया हमारी संस्था की ओर से नहीं लिया जाता है।
वहीं जैन सोशल ग्रुप सेंट्रल संस्था के संस्थापक अध्यक्ष कमल संचेती ने बताया कि वह साल 1993 से काम कर रहें है। उन्होंने अब तक 3250 नेत्रदान कराए है। पहले लोग नेत्रदान को लेकर संकोच करते थे। उन्हें बहुत समझाया जाता था। इसके बाद नेत्रदान के लिए मानते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब लोगों में जागरूकता बढ़ी है। अब 80 फीसदी कॉल आगे से आते है। अब लोग स्वयं कॉल कर नेत्रदान के लिए कहते है। 20 फीसदी केस में हम प्रयास करते है।
नहीं होती पूरी आंख ट्रांसप्लांट
वर्तमान में, केवल कॉर्निया और स्क्लेरा का उपयोग ट्रांसप्लांटेशन के लिए किया जा सकता है न कि पूरी आंख का। कॉर्निया एक ट्रांसप्लांट परत है, जो आंख के अगले हिस्से को कवर करता है और स्क्लेरा आंख का सफेद भाग है। वास्तव में, कॉर्निया ट्रांसप्लांट वर्तमान में मानवों में सबसे अधिक उपयोग होने वाली सामान्य ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में से एक है।
स्वैच्छिक व समाज सेवा से जुड़ा कार्य है नेत्रदान
यह समाज सेवा का पूरी तरह से स्वैच्छिक कार्य है, जिसके लिए दानदाता या उसके परिवार को कोई पैसा नहीं दिया जाता है, क्योंकि अंगों की बिक्री या खरीद गैर-कानूनी है। दानदाता के परिवार को नजदीकी नेत्र बैंक से संपर्क करना चाहिए ताकि चिकित्सक आकर परीक्षण कर सके और आंखों को प्राप्त कर सके। इस पूरी प्रक्रिया में मुश्किल से आधा घंटे का समय लगता है। दानदाता के परिवार से नेत्रदान की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए किसी भी तरह की राशि का भुगतान करने के लिए नहीं कहा जाता है।
हर कोई नेत्रदान करने के लिए योग्य नहीं है
आंखें दान करने के लिए सबसे आसान अंगों में से एक है। कमजोर दृष्टि और यहां तक कि मोतियाबिंद का इलाज करवा चुकी आंखों को भी दान करने में कोई परेशानी नहीं है। दानदाता को उच्च जोखिम वाली बीमारियों जैसे एचआईवी, हेपेटाइटिस, सिफिलिस आदि के लिए परीक्षण कराने की जरूरत होती है। ऐसे मामलों में जहां आंखों के टिशू दान के लिए उपयुक्त नहीं हैं, उन्हें मेडिकल रिसर्च के लिए उपयोग किया जाता है।