
निवाई. श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ गुंसी में भारत गौरव आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ससंघ के सान्निध्य में गुरुवार को भगवान शांतिनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा कार्यक्रम श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुआ। धार्मिक आयोजन में निवाई, जयपुर, चाकसू, टोंक सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह भगवान शांतिनाथ का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न होने के बाद आयोजित धर्मसभा में आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने कहा कि जीव के अनादिकाल से संसार में भटकने का मूल कारण केवल मोह है। मोहनीय कर्म ही जीव को जन्म-मरण के अंतहीन चक्र में बांधे रखता है। जब तक मोह समाप्त नहीं होगा, तब तक संसार का परिभ्रमण भी समाप्त नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मोह का अर्थ किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा विषय में इस प्रकार आसक्त हो जाना है कि मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप, अपने स्वभाव और अपने मूल धर्म को ही भूल जाए। जीव जब अपने अस्तित्व को छोड़कर पर पदार्थों में अपना अस्तित्व खोजने लगता है, तभी बंधन उत्पन्न होता है। इसके विपरीत जो व्यक्ति अपने आत्मस्वरूप को पहचान लेता है और अपने अतिरिक्त समस्त पदार्थों को पर मानता है, वही मोक्ष प्राप्ति का अधिकारी बनता है। आर्यिका ने कहा कि व्यवहार जगत में अपना और पराया शब्दों का प्रयोग स्वाभाविक है। प्रतीक जैन सेठी ने बताया कि सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ जिनालय में भगवान शांतिनाथ के दर्शन के लिए प्रतिदिन दूर-दराज से श्रद्धालुओं का आगमन हो रहा है। उन्होंने बताया कि आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ससंघ के सान्निध्य में 21 से 29 जुलाई तक श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ का भव्य आयोजन होगा। नौ दिवसीय इस धार्मिक महोत्सव में प्रदेशभर से हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होगें।