जयपुर

आवश्यकता होने पर ही काम में लेवें……… बुरादे के खिलौनों से बदल रही लवाण की तस्वीर

Jul 17, 2026
Feature image

घर-घर रोजगार, महिलाओं के हुनर से देशभर में सज रहे रंग-बिरंगे तोरण और मालाएं
लवाण @ पत्रिका.
विश्व प्रसिद्ध लवाण दरी के बाद अब कस्बा बुरादे से बने रंग-बिरंगे खिलौनों के लिए नई पहचान बना रहा है। खराब प्लास्टिक से तैयार बुरादे से बनने वाले ये सजावटी उत्पाद हजारों लोगों की आजीविका का आधार बन चुके हैं। खासकर महिलाएं घर बैठे पेंटिंग और माला निर्माण कर प्रतिदिन 150 से 200 रुपए तक की आमदनी अर्जित कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं।

20 साल में छोटे काम से बना बड़ा उद्योग
खिलौना कारोबारी विनोद सिंह चंदेल और मनीष चंदेल बताते हैं कि वर्ष 2005 में शुरू हुआ यह काम आज संगठित उद्योग का रूप ले चुका है। वर्तमान में करीब 10 हजार महिला-पुरुष इस कार्य से जुड़े हैं, जबकि 100 से अधिक परिवार सीधे तौर पर इसी पर निर्भर हैं।

खराब प्लास्टिक से बनता है कच्चा माल
उद्योग में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल खराब प्लास्टिक और बोतलों से तैयार होता है। प्लास्टिक को गलाकर मशीनों से बुरादा बनाया जाता है, जिसे कारखानों में भेजा जाता है। मशीनों और विशेष डाई की मदद से गणेशजी, हाथी, ऊंट, बतख, चिड़िया, गाय, मोर, कटोरी व टोकरी जैसी आकृतियां तैयार होती हैं। कैमिकल प्रक्रिया से सफाई के बाद इन्हें रंगाई के लिए महिलाओं को दिया जाता है।

महिलाओं के हुनर से खिलौनों में आती है जान
महिलाएं लाल, हरा, नीला, पीला, गोल्डन, फिरोजी सहित कई रंगों से बारीक पेंटिंग कर साधारण खिलौनों को आकर्षक रूप देती हैं। इसके बाद इन्हें दोबारा कैमिकल प्रक्रिया से तैयार कर करीब 42 इंच लंबी मालाएं बनाई जाती हैं, जिनकी बाजार में कीमत 20 से 50 रुपए तक होती है। प्लास्टिक रिंग और सूती धागों से तैयार तोरण भी बाजार में खूब पसंद किए जा रहे हैं।

त्योहारों पर बढ़ती है मांग
कारोबारी अरविंद चंदेल के अनुसार दीपावली, नवरात्रा सहित अन्य पर्वों पर इन उत्पादों की मांग कई गुना बढ़ जाती है। तैयार माल दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बनारस, अयोध्या, मथुरा, जैसलमेर, पुष्कर, जयपुर और अजमेर सहित देश के अनेक शहरों तक भेजा जाता है। पर्यटन स्थलों पर भी इनकी अच्छी बिक्री होती है। उद्योग के लिए आवश्यक बुरादा मुख्य रूप से जयपुर से आता है। लवाण के कारीगर अपनी कला से इसे आकर्षक सजावटी उत्पादों में बदल देते हैं।

पत्रिका व्यू : छोटे प्रयास, बड़ी खुशहाली
लवाण का यह उद्योग बताता है कि स्थानीय संसाधनों और कारीगरों के हुनर का सही उपयोग कर रोजगार के बड़े अवसर पैदा किए जा सकते हैं। प्लास्टिक कचरे का पुनर्चक्रण जहां पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे रहा है, वहीं हजारों परिवारों, विशेषकर महिलाओं, को घर बैठे सम्मानजनक आय का साधन भी उपलब्ध करा रहा है। आने वाले वर्षों में यह उद्योग लवाण की नई पहचान बन सकता है।


फैक्ट फाइल:

कार्य शुरू: वर्ष 2005
एक दिन की मजदूरी: 150-200 रुपए
जुड़े परिवार: 100 से अधिक
कुल कार्यकर्ता: 10 हजार से अधिक महिला-पुरुष
रोजाना तैयार माल: लगभग 15 हजार माला
दैनिक खपत: 5 हजार माला व खिलौने
मशीनें: 4
पैकिंग कर्मचारी: 20




फोटो कैप्शन:
लवाण – कस्बे में तैयार रंगीन खिलौने।
मशीन पर बनता कच्चा माल।
पेंटिंग और पैकिंग के लिए तैयार माल।

दो ही फोटो लगाएं................................

Updated on:
17 Jul 2026 06:00 am
Published on:
17 Jul 2026 06:00 am