राजस्थान सरकार ने जैसलमेर जिले के 4 अलग-अलग क्षेत्रों में 17 हजार 561 बीघा जमीन को ओरण के रूप में दर्ज करने का फैसला किया है। इस संबंध में गत 27 तारीख को जयपुर में आयोजित राजस्व विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था कि आगामी 4 दिनों की अवधि में जैसलमेर जिले से प्राप्त ओरण भूमि संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृत किया जाएगा।
राजस्थान सरकार ने जैसलमेर जिले के 4 अलग-अलग क्षेत्रों में 17 हजार 561 बीघा जमीन को ओरण के रूप में दर्ज करने का फैसला किया है। इस संबंध में गत 27 तारीख को जयपुर में आयोजित राजस्व विभाग की उच्चस्तरीय बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था कि आगामी 4 दिनों की अवधि में जैसलमेर जिले से प्राप्त ओरण भूमि संबंधी प्रस्तावों को स्वीकृत किया जाएगा। उक्त निर्णय की अनुपालना में राज्य सरकार की ओर से जैसलमेर जिले की कुल 17,561 बीघा 07 बिस्वा ओरण भूमि को विधिवत रूप से आरक्षित कर लिया गया है।
जैसलमेर विधायक छोटूसिंह भाटी की ओर से जारी बयान में बताया गया कि देगराय ओरण, भीमसर में 5,882 बीघा 15 बिस्वा, बिंजोता ओरण में 597 बीघा 16 बिस्वा, श्री स्वांगिया माता ओरण, पूनमनगर में 3,607 बीघा 13 बिस्वा और श्री आलाजी ओरण, दिलावर का गांव एवं कुछड़ी में 7,473 बीघा 03 बिस्वा शामिल किए गए हैं। विधायक भाटी ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार की ओर से जैसलमेर विधानसभा क्षेत्र की परंपरागत ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर संरक्षित करने का यह एक ऐतिहासिक एवं दूरदर्शी निर्णय है, जिससे क्षेत्र की पर्यावरणीय, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को स्थायी संरक्षण प्राप्त होगा। उन्होंने इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए मुख्यमंत्री व राजस्व मंत्री हेमंत मीणा के प्रति जैसलमेर के बाशिंदों की ओर से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया। विधायक भाटी ने क्षेत्रवासियों को विश्वास दिलाया कि जिले में विद्यमान मुंहबोली ओरण, गोचर, नदी, नालों, कुओं, तालाबों, खडीनों एवं आगोर भूमियों के प्रस्ताव जिला स्तर से राज्य सरकार को भिजवाकर आगामी समय में स्वीकृत करवाए जाएंगे।
इस बीच टीम ओरण की ओर से गत दिनों से जारी तनोट से लेकर जयपुर के लिए पदयात्रा गुरुवार शाम को भादरिया पहुंची। जहां गुरुवार देर रात जिले के दोनों विधायक छोटूसिंह भाटी और पोकरण विधायक महंत प्रतापपुरी के पदयात्रियों से मिलने का कार्यक्रम बताया गया है। टीम ओरण के मुख्य कार्यकर्ता सुमेरङ्क्षसह सांवता ने पत्रिका के साथ बातचीत में बताया कि जिन 4 ओरण क्षेत्रों के 17 हजार से कुछ अधिक बीघा जमीन को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्णय लिया गया है, वह तो होना ही था। उन्होंने कहा कि हमारी मांग जिले भर में 25 लाख बीघा जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में ओरण सहित अन्य श्रेणियों में दर्ज करवाने की है। अभी इस दिशा में बहुत काम किया जाना बाकी है।