
पर्यटननगरी के तौर पर देश-दुनिया में पहचान बनाने वाले जैसलमेर शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के बाशिंदों को पिछले कुछ वर्षों से पर्याप्त पीने का पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है। हाल के सर्दियों के मौसम तक में लोगों को कई दिनों तक किसी न किसी तकनीकी खामी के चलते जलापूर्ति व्यवस्था के ठप होने का खामियाजा ट्रैक्टर के जरिए पानी खरीदने के रूप में झेलना पड़ा है। पिछले गर्मी के मौसम में तो रिकॉर्ड तोड़ पेयजल संकट बना रहा था।
हालत यह है कि जैसलमेर को प्रतिदिन 22 मिलियन लीटर की जरूरत होती है और उसके स्थान पर कभी 7-8 तो कभी 14-15 एमएल तक पानी मिलता रहा है। वैसे जैसलमेर में पेयजल की समस्या गत दो वर्षों से ज्यादा विकराल हुई है और इसका स्थायी समाधान करीब 195 करोड़ रुपए की योजना की मंजूरी और क्रियान्वयन पर टिका है। योजना के तहत मोहनगढ़ नहर से गजरूपसागर फिल्टर प्लांट तक नई पाइपलाइन बिछाने और गजरूपसागर तालाब को झील के रूप में विकसित किए जाने की है। गौरतलब है कि जैसलमेर शहर की जलापूर्ति इंदिरा गांधी नहर की बाड़मेर लिफ्ट योजना से होती है, लेकिन जब भी बिजली आपूर्ति बाधित होती है, शहर की प्यास बुझाना मुश्किल हो जाता है।
जल संग्रहण की माकूल व्यवस्था नहीं होने से गर्मी के साथ सर्दियों में भी पानी की भारी किल्लत बनी रहती है। राज्य सरकार को लगातार दो साल से पेश किए जाने वाले बजट में इस योजना की स्वीकृति के लिए प्रस्ताव भिजवाया जाता रहा है। एक बार फिर यह प्रस्ताव प्रशासनिक व विभागीय स्तर से भेजा गया है।
योजना के तहत मोहनगढ़ नहर से गजरूपसागर तक 450 एमएम की नई पाइपलाइन बिछाई जाएगी। गजरूपसागर में 225 एमएल पानी स्टोर होगा, जो 15 दिन की जलापूर्ति के लिए पर्याप्त होगा। इसके साथ ही योजना से अतिरिक्त फिल्टर प्लांट और पंप हाउस बनाए जाएंगे जो शहर की बढ़ती मांग के अनुरूप होंगे। गौरतलब है कि वर्तमान में 20 किमी पुरानी पाइपलाइन जर्जर अवस्था में है। आए दिन लीकेज होने से जलापूर्ति पर विपरीत असर पड़ता है।
Published on:
08 Feb 2026 11:55 pm
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