पोकरण राजकीय जिला चिकित्सालय में आग की बड़ी घटना हो जाती है तो उस पर काबू करने के लिए नगरपालिका की दमकल ही सहारा है।
पोकरण राजकीय जिला चिकित्सालय में आग की बड़ी घटना हो जाती है तो उस पर काबू करने के लिए नगरपालिका की दमकल ही सहारा है। हालांकि अस्पताल में 8 अग्निशमन यंत्र है और 2 कार्मिकों को नियुक्त भी किया गया है, लेकिन ये यंत्र छोटे होने के कारण बड़ी घटना के दौरान आग पर काबू करना मुश्किल होगा। गौरतलब है कि जिले के सबसे बड़े उपखंड मुख्यालय पर राजकीय जिला चिकित्सालय स्थित है। यहां प्रतिदिन 800 से 900 मरीज अपने उपचार के लिए पहुंचते है। साथ ही करीब 50 गर्भवती व धात्री महिलाएं और एक दर्जन से अधिक छोटे बच्चे हर समय भर्ती रहते है। इनडोर की बात करें तो 80 से 100 मरीज अस्पताल में भर्ती रहते है। पत्रिका पड़ताल में यह बात सामने आई है कि अस्पताल में 8 अग्निशमन यंत्र मौजूद है। जिन्हें अस्पताल में वार्डों, जनरेटर रूम, ऑक्सीजन प्लांट आदि जगहों पर रखवाया गया है। छोटी मोटी आग की घटना होने पर इन यंत्रों से आग पर काबू किया जा सकता है, लेकिन बड़ी घटना हो जाने की स्थिति में केवल नगरपालिका की दमकल ही सहारा है।
बड़े अस्पतालों में बकायदा आग की घटना को लेकर पर्याप्त इंतजाम होते है। जिसके अंतर्गत अस्पताल की छत पर पानी का बड़ा टैंक, पूरे परिसर में पाइपलाइन और बड़े पाइप की व्यवस्था होती है। साथ ही अलार्म भी लगा होता है, ताकि आग लगने पर तत्काल उसका सायरन बज सके, लेकिन पोकरण में जिला स्तरीय अस्पताल होने के बावजूद यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। केवल छोटे अग्निशमन यंत्र और नगरपालिका की दमकल के भरोसे ही व्यवस्था चल रही है। इसके अलावा आज तक कभी किसी टीम ने यहां फायर फाइटिंग सिस्टम की जांच नहीं की है।
विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा अस्पताल पोकरण में ही स्थित है। इस अस्पताल में पोकरण कस्बे सहित आसपास ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज अपने उपचार के लिए पहुंचते है। ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं पर भी सडक़ दुर्घटना होने पर घायलों और गंभीर हालत के मरीजों को भी इसी अस्पताल में लाया जाता है। अस्पताल में प्रतिदिन एक हजार से अधिक मरीज व उनके परिजन उपचार के लिए पहुंचते है।
पोकरण के राजकीय अस्पताल में पूर्व में आग की घटनाएं हो चुकी है। पूर्व में 9 सितंबर 2013 की रात जनरेटर रूम में भयंकर आग लगी थी। इस दौरान यहां आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं होने पर नगरपालिका की दमकल बुलवाई गई और करीब 3 घंटे की मशक्कत कर आग पर काबू किया गया था। हालांकि इस घटना के बाद कभी कोई बड़ी घटना नहीं हुई है, लेकिन कई बार अस्पताल में छोटी-मोटी शॉर्ट सर्किट की घटनाएं जरूर हो चुकी है। इन सब के बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से यहां आग बुझाने के लिए पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए है।