4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

ओरण बचाओ समिति की पदयात्रा जारी…मोकला में दर्ज ओरण भूमि के क्षेत्रफल पर असंतोष

पिछले कई महीनों से जैसलमेर जिले की राजनीति के केंद्र में आया ओरण जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने का मुद्दा अब लगभग सरकार की चौखट पर पहुंच चुका है।

3 min read
Google source verification

पिछले कई महीनों से जैसलमेर जिले की राजनीति के केंद्र में आया ओरण जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने का मुद्दा अब लगभग सरकार की चौखट पर पहुंच चुका है। ओरण बचाओ संघर्ष समिति की ओर से जैसलमेर जिले के तनोटराय मंदिर से निकाली जा रही पदयात्रा शनिवार को किशनगढ़ से करीब 30 किलोमीटर दूर तक पहुंच गई और आगामी दो-तीन दिनों में अंतिम पड़ाव स्थल राजधानी जयपुर पहुंच जाएगी। जहां टीम ओरण के सदस्यों की ओर से धरना दिया जाना है। दूसरी ओर राज्य सरकार की तरफ से गत दिनों मोकला गांव के समीप डूंगरपीर की ओरण में 4940 बीघा जमीन को ओरण के तौर पर दर्ज करवाने का निर्णय लिया गया। एक तरफ जिले के दोनों विधायकों जैसलमेर के छोटूसिंह भाटी और पोकरण के महंत प्रतापपुरी की तरफ से दर्ज करवाई गई ओरण पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए भविष्य में और जमीनों को ओरण-गोचर आदि में दर्ज करवाने की उम्मीद जताई जा रही है, दूसरी ओर पदयात्रा पर निकले टीम ओरण के सदस्य इसे आधी-अधूरी स्वीकृति करार दे रहे हैं। उनका साफ कहना है कि, सरकार की तरफ से जिला प्रशासन की ओर से तैयार की गई फाइलों में कांट-छांट की जा रही है, जो बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कुल भूमि का 8 प्रतिशत हिस्सा ओरण

टीम ओरण की ओर से जारी बयान में बताया गया कि जैसलमेर जिले की जैसलमेर की कुल भूमि का 8 प्रतिशत हिस्सा ओरण है। जो आज भी जिंदा ओरणों के रूप में मौजूद है। फिर भी सरकार उन जिंदा ओरणों को कांट- छांट कर खत्म करने का प्रयास कर रही है। हाल ही में मोकला गांव की मौजूदा 25 हजार बीघा ओरण को मात्र 4 हजार में सीमित कर दिया है। उन्होंने इसके विरोध में शनिवार रात 9.30 बजे से एक्स पर अधूरी ओरण स्वीकार नहीं हैश से ट्रेंड करने की बात कही गई है। टीम ओरण के एक अन्य बयान में कहा गया कि दादा डूंगर पीर की मोकला ओरण सेटलमेंट के गवाई दस्तूर में 25 हजार बीघा दर्ज है। अब सरकार इसे मात्र 8000 बीघा ओरण दर्ज कर बाकी जमीन कंपनी को देना चाहती है।

गत 21 जनवरी से शुरू हुई यात्रा

- ओरण बचाओ पदयात्रा जैसलमेर की प्रमुख शक्तिपीठ तनोट से गत 21 जनवरी से शुरू की गई। यह पदयात्रा करीब 725 किमी दूरी तय कर जयपुर तक चलने वाली है। जिसका उद्देश्य पारंपरिक ओरण भूमियों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाना है।

- बीते अर्से के दौरान राज्य सरकार ने देगराय ओरण में 5882, बिंजोता ओरण में 597, स्वांगिया माता ओरण पूनमनगर में 3607, आलाजी ओरण में दिलावर का गांव व कुछड़ी में 7473 बीघा भूमि ओरण के तौर पर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाने के निर्देश जारी किए गए।

- ओरण बचाओ संघर्ष समिति की ओर से अब तक जैसलमेर मुख्यालय पर कई बार धरना-प्रदर्शन किए जा चुके हैं। उससे भी पहले देवस्थानों से जैसलमेर के लिए छोटी-छोटी पदयात्राएं निकाल कर शासन-प्रशासन का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकृष्ट करवाया गया।

सभी वास्तविक ओरण रिकॉर्ड में लें

ओरण बचाओ संघर्ष समिति की तरफ से तनोट से शुरू की गई पदयात्रा अब जयपुर पहुंचने वाली है। हमारी मांग स्पष्ट है- जैसलमेर की सभी वास्तविक ओरणों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवाया जाए। प्रशासन की तरफ से पूरी छानबीन के बाद सरकार को भेजी जाने वाली फाइलों में कांट-छांट कर जमीनों को राजस्व रिकॉर्ड में लिया जाना अस्वीकार्य है।

- सुमेरसिंह सांवता, मुख्य आंदोलनकारी

आस्था के केंद्र हैं ओरण

जैसलमेर जिले में ओरण क्षेत्र आज भी जनआस्था के केंद्र हैं। राज्य सरकार ने मोकला में हाल में जो ओरण भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कर अच्छा कदम उठाया है। अन्य ओरण भूमियों को भी राजस्व में दर्ज करवाने के लिए मैं निरंतर प्रयासरत हूं। साथ ही यह भी आवश्यक है कि, सोलर संयंत्रों के पास वनीकरण किया जाए ताकि पर्यावरण की शुद्धता बनी रहे। ऐसे ही गोवंश आदि के लिए चारागाह भी बनाए जाने चाहिए।

- छोटूसिंह भाटी, विधायक जैसलमेर