लोक देवता बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन करने भादवा सुदी पूर्णिमा को देश भर से हजारों श्रद्धालु रामदेवरा पहुंचे।
लोक देवता बाबा रामदेव की समाधि के दर्शन करने भादवा सुदी पूर्णिमा को देश भर से हजारों श्रद्धालु रामदेवरा पहुंचे। श्रद्धालुओं के आगमन से सडक़ो पर काफी रेलमपेल देखने को मिली। रविवार सुबह जहां समाधि परिसर यात्रियों से भरा रहा। वहीं समाधि परिसर के बाहर बैरिकेड खाली दिखाई दिए। बाबा रामदेव का 641 मेला गत 25 अगस्त से शुरू हुआ था, लेकिन श्रद्धालुओ की आवक के साथ ही मेले की विभिन्न व्यापारिक गतिविधिया का शुभारंभ दो माह पहले ही शुरू हो गई थी। बाबा रामदेव समाधि के दो माह में करीब 60 लाख श्रद्धालुओं ने समाधि के दर्शन किए। प्रतिवर्ष भादवा सुदी दूज से एकादशी तक मेला आयोजित होता है। मारवाड़ का कुंभ माने जाने वाला बाबा रामदेव का रामदेवरा मेला जब शुरू होता है तो पूरा प्रदेश बाबा रामदेव के जयकारों से गूंज उठता है। प्रदेश का हर शहर, गांव, ढाणी और हर गली हर नुक्कड़ पर बाबा रामदेव के जयकारे ही गूंजते है। सडक़ों पर पंचरंगी ध्वजा लिए पैदल यात्रा करने वालो का तांता लगा रहता हैं। दो माह की मेला अवधि के दौरान रामदेवरा की तरफ आने वाली हर सडक़ पर बाबा के ही यात्री दिखते हैं। कोई पैदल, कोई दण्डवत, कोई लुढक़ते हुए तो कोई मोटरसाइकिल, निजी वाहन, बसों और रेलों के माध्यम से रामदेवरा पहुंचते हैं।
मारवाड़ के कुंभ के रूप में जाने वाला रामदेवरा मेले की यात्री भीड़ में हर व्यापारी अपना सामान बेचने के लिए दुकान लगाते हैं। पूर्व में मेले की भीड़ सीमित होती थी तो आस पास के जिलों से ही व्यापारी रामदेवरा मेले में दुकान लगाने आते थे। समय के साथ मेले की यात्री भीड़ बढऩे से दिन प्रतिदिन बढ़ी यात्रियों की भारी आवक से वर्तमान में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में व्यापारी अपना सामान बेचने के लिए रामदेवरा में अपना व्यापार करते है।
बाबा रामदेव सामाजिक समरसता के संवाहक रहे। बाबा रामदेव का जीवन मानवता के कल्याण के लिए समर्पित रहा। बाबा रामदेव ने समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने एवं सामाजिक समरसता स्थापित करने के लिए जीवन भर कार्य किया।