
जैसलमेर. थार के तपते रेगिस्तान में अब बरसात के मौसम में पानी का विशाल विस्तार दिखाई देगा। जैसलमेर जिले के घांटियाली क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर परियोजना के आरडी-1356 पर 28 किलोमीटर परिधि वाला विशाल एस्केप रिजर्वायर तैयार हो चुका है। मानसून के दौरान पंजाब से आने वाला अतिरिक्त पानी अब सीमा पार पाकिस्तान में बहने के बजाय इस कृत्रिम झील में संचित होगा।
लगभग 13 मीटर औसत गहराई वाला यह जलाशय 1406 एमसीएफटी पानी संग्रहित करने में सक्षम है। परियोजना को पूरा किया गया है। रिजर्वायर जल जीवन मिशन के तहत विकसित चार एस्केप जलाशयों में शामिल है, जिसमें जैसलमेर और बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान में पेयजल आपूर्ति को मजबूती मिल सकेगी। इसके साथ ही नहरबंदी के दौरान भी सुरक्षित जल भंडार उपलब्ध रहेगा। जलाशय की तली और ढलानों पर एचडीपीई शीट बिछाई गई है, जिससे रेतीली जमीन में पानी का रिसाव नहीं होगा।
जिम्मेदारों का दावा है कि चारों एस्केप रिजर्वायरों से जल जीवन मिशन की 43 वृहद पेयजल परियोजनाओं को अतिरिक्त पानी मिलेगा, जिससे प्रदेश के 6,707 गांवों के 20 लाख से अधिक परिवारों को दीर्घकालिक लाभ पहुंचेगा। रेगिस्तान में जल संरक्षण की यह पहल भविष्य में पश्चिमी राजस्थान की जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
मोहनगढ़. क्षेत्र में पिछले 24 घंटे से अधिक समय से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। शुक्रवार शाम शुरू हुई बारिश का दौर रात करीब 11 बजे तक जारी रहा। इसके बाद पूरी रात रिमझिम बारिश होती रही। शनिवार सुबह से शुरू हुई बारिश दिनभर रुक-रुक कर जारी रही, जिससे पूरा क्षेत्र तरबतर हो गया। इस दौरान पिछले तीस घंटे में मात्र दो घंटे ही बिजली आपूर्ति नियमित हो पाई, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। शनिवार को घने बादलों के कारण दिन में भी अंधेरा छाया रहा। लगातार बारिश से कस्बे के निचले इलाकों में जलभराव हो गया। गली-मोहल्लों में पानी बहता नजर आया और नाले तेज गति से बहे। कई पुराने मकानों की छतों से पानी टपकने की शिकायतें भी सामने आईं, जिससे लोगों को परेशानी हुई। शनिवार शाम हुई तेज बारिश से आवागमन भी प्रभावित रहा। दूसरी ओर, नहरी क्षेत्र में लगातार वर्षा से किसानों और पशुपालकों के चेहरे खिल उठे हैं। खेतों में नमी बढ़ने से खरीफ फसलों को लाभ मिलने की उम्मीद है तथा पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। हालांकि, कच्चे मकानों में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है और वे मौसम साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।