मौन जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट तक पहुंचा। इस दौरान लोगों ने हाथों में पानी के साथ बिजली आपूर्ति की मांग से संबंधित नारे लिखे पन्ने थाम रखे थे।
पेयजल संकट से त्रस्त लोगों की ओर से पिछले दिनों बीपी टैंक पर विरोध प्रदर्शन किए जाने के मामले में जलदाय विभाग के अधिकारियों की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाने से नाराज शहरवासियों ने गुरुवार को गड़ीसर प्रोल से कलेक्ट्रेट तक मौन जुलूस निकाला। मौन जुलूस शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट तक पहुंचा। इस दौरान लोगों ने हाथों में पानी के साथ बिजली आपूर्ति की मांग से संबंधित नारे लिखे पन्ने थाम रखे थे। कलेक्ट्रेट पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलक्टर को पानी की समस्या के शीघ्र समाधान करने और पुलिस में दर्ज करवाए गए मामले को वापस लिवाने की मांग की गई है। जुलूस में मुख्य रूप से इंदिरा कॉलोनी क्षेत्र के बाशिंदों के साथ शहर के अन्य इलाकों के रहवासी भी शामिल हुए। कलेक्ट्रेट के बाहर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए लोगों ने शहर में पेयजल संकट को लेकर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाने को गैरलोकतांत्रिक कदम बताया।
गौरतलब है कि गत 23 अगस्त को इंदिरा कॉलोनी के कई बाशिंदे जिनमें महिलाएं भी शामिल थी, जलदाय विभाग के बीपी टैंक पर पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया था कि कॉलोनी क्षेत्र में 10 दिनों से पीने के पानी की समस्या व्याप्त है और जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस दौरान विभाग के कनिष्ठ अभियंता पूनम परिहार को चूडिय़ां पहनाई गई थी। इस घटना के बाद जलदाय विभाग के अधिकारियों व कार्मिकों के साथ कनिष्ठ अभियंता ने पुलिस कोतवाली पहुंच कर मुकदमा दर्ज करवा दिया। जिसके विरोध में पिछले दिनों से सोशल मीडिया पर लोग टीका-टिप्पणियां कर रहे थे। गुरुवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत लोग गड़ीसर प्रोल पर जमा हुए और मौन जुलूस के रूप में मुख्य बाजारों से होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। आधा दिन तक दुकानें बंद रखने का भी आह्वान किया गया था लेकिन कुछ दुकानों को छोडकऱ बाजार सामान्य रूप से खुला रहा। मौन जुलूस हनुमान चौराहा से होते हुए कलेक्टर ऑफिस पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने कलक्टर को पीने के पानी की समस्या से अवगत करवाते हुए महिला समेत अन्य पर दर्ज किए मुकदमे को वापस लेने की मांग की। मौन जुलूस में कांग्रेस जिलाध्यक्ष उम्मेदसिंह तंवर, भाजपा के सुशील व्यास, पूर्व सभापति अशोक तंवर सहित अन्य कई सामाजिक कार्यकर्ता भी शामिल हुए। सभी ने शहर में नियमित जलापूर्ति की मांग की और दर्ज करवाए गए मुकदमे को वापस लेने पर जोर दिया।
एक तरफ पानी को लेकर टकराव के हालात बने हैं तो दूसरी ओर जैसलमेर शहर में पिछले लम्बे अर्से से पीने के पानी का संकट बरकरार है। कभी मोहनगढ़ हेडवक्र्स पर विद्युत संकट तो कभी पाइप लाइनों में टूट-फूट आदि के चलते शहर में पीने के पानी की आपूर्ति 4 से 6 दिनों के अंतराल में की जा रही है। लोगों को टैंकर मंगवा कर पानी की व्यवस्था करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। शहर में ऐसे भी क्षेत्र हैं, जहां तक ट्रेक्टर टैंकर भी नहीं पहुंच पाते। वहां के बाशिंदों को एकमात्र जलदाय विभाग की लाइनों से आने वाले पानी का ही सहारा है, उनकी तकलीफें कई गुना बढ़ी हुई है। वहीं शहरी क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति में आए दिन होने वाले व्यवधानों के चलते भी लोग हैरान-परेशान चल रहे हैं।