जैसलमेर

jaisalmer: शुरुआती हिचक के बाद गोडावण ने भरी उन्मुक्त उड़ान

जैसलमेर. राज्य पक्षी गोडावण के संरक्षण इतिहास में रविवार को अहम अध्याय जुड़ा, जब पहली बार ब्रीडिंग सेंटर के दो गोडावणों को जंगल में छोड़ा गया। रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर से प्रशिक्षित दोनों गोडावणों को डीएनपी की सुदासरी रेंज में प्राकृतिक आवास के लिए रवाना किया गया। तीन माह की री-वाइल्डिंग ट्रेनिंग के बाद जंगल पहुंचे दोनों गोडावणों ने हिचकिचाने के बाद भरी उन्मुक्त उड़ान।
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Oct 04, 2026
jaisalmer news
ब्रीडिंग सेंटर से पहली बार गोडावण को जंगल में छोड़ने के अवसर पर केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव और प्रदेश के वन राज्य मंत्री संजय शर्मा । पत्रिका

जैसलमेर. दुर्लभ प्रजाति और राज्य पक्षी गोडावण के इतिहास में रविवार का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। जब केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेन्द्र यादव और प्रदेश के वन राज्यमंत्री संजय शर्मा की मौजूदगी में जिले के रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर के दो गोडावणों को आगामी जीवन के लिए पहली बार जंगल में छोड़ा गया।

सेंटर से आंखों पर काली पट्टी बांध कर लाए गए गोडावणों को जब छोड़ा गया तो पहले वे हिचके और बाद में उनकी उन्मुक्त उड़ान देखने लायक रही। गौरतलब है कि जंगल में छोड़े जाने से पहले इन गोडावणों को ब्रीडिंग सेंटर में स्थित 9.25 करोड़ की री-वाइल्डिंग टनल में 10 अन्य गोडावण के साथ तीन महीनों तक अकेले रहने और शिकार करने की ट्रेनिंग दी जा चुकी है। रविवार को सम क्षेत्र के राष्ट्रीय मरु उद्यान (डीएनपी) की सुदासरी रेंज में इन्हें आंखों पर काली पट्टी बांधकर लाया गया था। दोनों गोडावण की उम्र करीब 7 महीने, एक फीट ऊंचाई और 5 किलो वजन है।

टनल में करवाया अभ्यास

- रामदेवरा ब्रीडिंग सेंटर में इस साल फरवरी माह में जंगल से गोडावण के दो अंडे संरक्षित कर लाया गया। इन अंडों से चूजे निकले, जिन्हें जंगल में छोडऩे से पहले करीब 3 महीने तक टनल में रखा गया।

- जहां उन्हें खुले आसमान में उडऩे, खुद भोजन तलाशने और प्राकृतिक माहौल में रहने का अभ्यास कराया गया। स्वास्थ्य और व्यवहार से जुड़ी जांच में दोनों पक्षी पूरी तरह स्वस्थ पाए गए।

- गोडावणों की खास ट्रेनिंग के लिए 9.25 करोड़ रुपए की लागत से करीब 6 महीने पहले विशेष टनल तैयार की गई थी। दोनों गोडावणों की सुरक्षा के लिए उनके शरीर पर जीपीएस टैग लगाए गए हैं। इनके जरिए वैज्ञानिक उनकी लगातार निगरानी करेंगे। इसमें देखा जाएगा कि गोडावण प्राकृतिक वातावरण में किस तरह उड़ रहे हैं, भोजन की तलाश कैसे कर रहे हैं, किस क्षेत्र में घूम रहे हैं और उनका व्यवहार कैसा है।

- यह कोशिश की जाएगी कि वे बिजली की हाईटेंशन लाइन और शिकारियों के संपर्क में न आएं। वैज्ञानिक इनकी ट्रैकिंग से मिलने वाले आंकड़ों का अध्ययन करेंगे।

- भविष्य में ब्रीडिंग सेंटर में तैयार होने वाले दूसरे गोडावणों को भी प्राकृतिक आवास में सुरक्षित तरीके से छोडऩे की योजना बनाने में मदद मिलेगी।

10 साल पहले हुई शुरुआत

भारतीय वन्यजीव संस्थान और वन विभाग करीब 10 साल से गोडावण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तरीके से काम कर रहे हैं। गोडावण संरक्षण के लिए साल 2016 में इंटीग्रेटेड जीआइबी कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की नींव रखी गई थी। इसके बाद 2019 में राजस्थान में बड़े स्तर पर गोडावण ब्रीडिंग प्रोग्राम शुरू किया गया। जैसलमेर के सम में अस्थायी ब्रीडिंग सेंटर से शुरुआत हुई। इसके बाद रामदेवरा में आधुनिक ब्रीडिंग सेंटर तैयार किया गया। वर्ष 2023 के मार्च माह में इस सेंटर में कृत्रिम रूप से पोषित पहले चूजे का जन्म हुआ। गत वर्ष पक्षियों को री-वाइल्डिंग के तहत जंगल में रहने की ट्रेनिंग शुरू की गई।

Updated on:
04 Oct 2026 08:30 pm
Published on:
04 Oct 2026 08:30 pm