जैसलमेर

धुआं-धुआं हो रही परमाणु नगरी,कड़ी कार्रवाई के अभाव में वातावरण हो रहा है ऐसा,जानिए पूरी खबर

-प्रदूषण नियंत्रण की जांच की व्यवस्था तो है, लेकिन करे कौन ?-पीयूसी नहीं होने पर वाहनों के एक हजार का चालान काटने का प्रावधान

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Jul 09, 2018
धुआं-धुआं हो रही परमाणु नगरी,कड़ी कार्रवाई के अभाव में वातावरण हो रहा है ऐसा,जानिए पूरी खबर

जैसलमेर/पोकरण. वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए कानून बनाकर कम धुएं वाले वाहनों का संचालन किया जाता है। इसके लिए वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण की जांच की भी व्यवस्था है, लेकिन कड़ी कार्रवाई नहीं होने से वाहन चालक इसकी जांच नहीं करवाते है तथा धड़ल्ले से सडक़ों पर वाहन दौड़ाकर प्रदूषण फैला रहे है बावजूद इसके जिम्मेदारों की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐसे में इनके हौसले बुलंद हो रहे है। मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 190/2 के अंतर्गत कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थान पर कोई वाहन ऐसे चलाता है, जिससे सडक़ सुरक्षा, शोर नियंत्रण व वायु प्रदुषण के संबंध में विहित मानकों का उल्लंघन होता है, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र पीयूसी प्रत्येक छह माह में जारी करवानी होती है। यदि पीयूसी नहीं होती है, तो यातायात पुलिस व परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है। यातायात पुलिस की ओर से टैक्सी परमिट पर एक हजार, निजी वाहन पर 500 रुपए व बाइक के 250 रुपए निर्धारित है। इसी तरह परिवहन विभाग की ओर से किसी भी वाहन के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र पीयूसी नहीं पाई जाती है, तो उसके एक हजार रुपए का चालान किया जाता है।
यह है हकीकत
-प्रदूषण जांच के लिए सरकार की ओर से किसी फर्म को ठेका दिया जाता है।
-फर्म की ओर से अलग-अलग क्षेत्र में वाहनों के प्रदुषण की जांच की जाती है तथा पीयूसी जारी की जाती है।
-पोकरण क्षेत्र में प्रदुषण जांच के लिए उचित व्यवस्था नहीं है। यहां मात्र एक वाहन लगा हुआ है, जो मुख्य मार्गों पर घूमकर वाहनों के प्रदुषण की जांच करता है। -यदि किसी वाहन चालक को पीयूसी चाहिए, तो उस वाहन की खोज करनी पड़ती है।
-संबंधित वाहन नहीं मिलने की स्थिति में वाहन चालक अपने वाहनों को सरपट दौड़ाते है।

हर वाहन की नहीं हो पाती जांच
पर्यावरण को दूषित होने से बचाने के लिए वाहनों की समय पर सर्विस करवानी होती है। यदि सर्विस नहीं होती है, तो वाहन अधिक धुंआ छोड़ता है। इसकी जांच के लिए पीयूसी जारी की जाती है। पीयूसी के लिए प्रत्येक वाहन की जांच नहीं हो पाती है। हालांकि कई बार अभियान के दौरान पुलिस व परिवहन विभाग की ओर से नाकाबंदी कर दस्तावेजों की जांच की जाती है, लेकिन आमतौर पर वाहन चालकों के हेलमेट, सीट बैल्ट, पंजीयन प्रमाण पत्र, अनुज्ञा पत्र देखकर उन्हें छोड़ दिया जाता है। प्रत्येक वाहन की जांच नहीं होने से कार्रवाई के आंकड़ों में बढोतरी नहीं हो पा रही है।

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फैक्ट फाइल
- 1000 से अधिक टैक्सियां होती है पोकरण में संचालित
- 5000 से अधिक दुपहिया वाहन दौड़ रहे है क्षेत्र की सडक़ों पर
- 100 से अधिक बसों का होता है विभिन्न मार्गों पर संचालन
- 1000 से अधिक ट्रक, ट्रैक्टर, जेसीबी व अन्य बड़े वाहन
- 3 माह में यातायात पुलिस ने काटे 47 चालान
- 30 से अधिक वाहनों के चालान प्रतिमाह करता है परिवहन विभाग

की जाती है कार्रवाई
वाहनों चालकों के पास पीयूसी है या नहीं, इसके लिए नाकाबंदी कर वाहनों की जांच की जाती है। यदि पीयूसी नहीं पाई जाती है, तो उनके चालान किए जाते है। जिलेभर में लगातार कार्रवाई की जा रही है।
-टीकूराम पूनड़, जिला परिवहन अधिकारी, जैसलमेर

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Published on:
09 Jul 2018 09:14 am
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