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गंदी जल टंकियां बनी खतरा, पोकरण में दूषित पेयजल से बढ़ता स्वास्थ्य संकट

पोकरण कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के दावे जमीनी हकीकत से उलट नजर आ रहे हैं।

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पोकरण कस्बे और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति के दावे जमीनी हकीकत से उलट नजर आ रहे हैं। जलाशयों, एसआर, सीडब्ल्यूआर और जीएलआर की नियमित सफाई नहीं होने से टंकियों में कचरा, काई और गंदगी जमा हो रही है, जिसके बावजूद यही पानी बिना जांच सीधे सप्लाई किया जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई जल टंकियों में पक्षियों ने घोंसले बना लिए और अंडे तक दिखाई दे रहे हैं, जो लापरवाही की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।

गौरतलब है कि पोकरण-फलसूंड-बालोतरा-सिवाणा पेयजल लिफ्ट परियोजना से क्षेत्र में पानी की आपूर्ति होती है। नाचना मुख्य नहर से पानी पोकरण क्षेत्र के बीलिया गांव स्थित हेडवर्क्स तक पहुंचता है। यहां शुद्धिकरण के बाद पानी को सीडब्ल्यूआर और एसआर के माध्यम से कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों में सप्लाई किया जाता है। बीलिया हेडवर्क्स से पाइपलाइन के जरिए जीएलआरों तक पानी पहुंचाया जाता है, लेकिन टंकियों की सफाई नहीं होने से शुद्ध पानी भी दूषित हो रहा है।

ग्राउंड रियलिटी: सिस्टम में कहां टूट रही कड़ी

-छह माह में सफाई का नियम, कई टंकियों में सालों से सफाई नहीं

-एसआर, सीडब्ल्यूआर और जीएलआर में जमा कचरा और काई

-कई स्थानों पर केवल तारीख बदलकर सफाई दर्शाई जा रही

-स्वामीजी की ढाणी क्षेत्र में जीएलआर में पानी तक नहीं पहुंचा

-शिकायत पर सीमित सफाई, फिर स्थिति जस की तस

हकीकत यह भी

लाठी क्षेत्र में कई जीएलआरों पर बिना सफाई केवल नई तारीख लिख दी गई, जबकि अंदर कचरा और गंदगी यथावत बनी हुई है। स्वामीजी की ढाणी क्षेत्र में एक जीएलआर में वर्षों से न सफाई हुई और न ही पानी पहुंचा। टंकियों के अंदर कबूतरों के घोंसले और अंडे देखे जा सकते हैं, जो स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं।

स्वास्थ्य पर असर: बढ़ती बीमारियों का खतरा

दूषित पानी का असर अब स्पष्ट दिखने लगा है। कस्बे और ग्रामीण क्षेत्रों में त्वचा रोग, खुजली, दाद, पेट दर्द, डायरिया और टाइफाइड के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

विश्लेषण: क्यों बढ़ रहा संकट

-निगरानी तंत्र कमजोर, ठेकेदारों पर नियंत्रण नहीं

-सफाई कार्य कागजी औपचारिकता तक सीमित

-जल गुणवत्ता जांच में नियमितता का अभाव

ग्रामीण क्षेत्रों में जवाबदेही तय नहीं

-स्थिति में सुधार के लिए नियमित सफाई, पारदर्शी मॉनिटरिंग और जिम्मेदारी तय करना जरूरी।

अशुद्ध पानी का सेवन बढ़ाता है त्वचा-पेट सम्बंधित बीमारी

अशुद्ध पानी के सेवन से त्वचा और पेट से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। साफ पानी और नियमित टंकी सफाई नहीं होने पर मरीजों की संख्या लगातार बढ़ सकती है।

- डॉ. जगदीश गहलोत, चिकित्सक, पोकरण

अभी चल रहा है सफाई का कार्य

सफाई का कार्य मार्च माह में शुरू कर दिया गया था, जो अभी तक चल रहा है। शीघ्र ही पूरे क्षेत्र में सभी टंकियों की सफाई का कार्य पूर्ण किया जाएगा।

- रामनिवास रैगर, अधिशासी अभियंता जलदाय विभाग, पोकरण