पश्चिमी सरहद की सुरक्षा में लंबे समय से ऊंट और प्रशिक्षित श्वानों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, अब इनके साथ रोबोटिक डॉग्स भी शामिल हो रहे हैं।
पश्चिमी सरहद की सुरक्षा में लंबे समय से ऊंट और प्रशिक्षित श्वानों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, अब इनके साथ रोबोटिक डॉग्स भी शामिल हो रहे हैं। भारतीय सेना ने इन रोबोटिक डॉग्स को विशेष अभियानों और निगरानी के लिए तैयार किया है। इनकी प्रमुख विशेषता है— थर्मल कैमरा, 360 डिग्री घूमने वाला सेंसर, रडार और रियल-टाइम वीडियो कैप्चर सिस्टम। दुश्मन की गतिविधि, ठिकानों की पहचान और गुप्त आवाजाही पर इनकी नजर रहती है।
करीब 50 किलो वजनी और 27 इंच ऊंचे इन रोबोटिक डॉग्स को एक बार चार्ज करने पर 10 घंटे तक संचालित किया जा सकता है, जबकि पुन: चार्ज सिर्फ 1 घंटे में पूरा होता है। इन्हें 1 मीटर से 10 किलोमीटर की दूरी तक रिमोट सिस्टम से नियंत्रित किया जा सकता है। छोटी दूरी पर वाई-फाई और लंबी दूरी पर 4जी-एलटीई से ये सक्रिय रहते हैं। इनका संचालन मौसम पर निर्भर नहीं। -40 डिग्री की ठंड से लेकर 55 डिग्री की गर्मी तक समान क्षमता से कार्य करते हैं। बर्फीले पहाड़, रेगिस्तानी टीलों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और सीढ़ियों पर चलने में सक्षम हैं। इससे सीमा क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया और जोखिम कम करने में सहायता मिलेगी।
हाल ही में ऑपरेशन त्रिशूल के दौरान रेगिस्तानी क्षेत्र में बैटल एक्स डिविजन के सैनिकों ने रोबोटिक डॉग्स के साथ अभ्यास किया। अभ्यास में दुश्मन की खोज, हथियार परिवहन, ठिकानों की पहचान और फायर सपोर्ट जैसे कार्य सफलतापूर्वक पूरे हुए। वर्ष 2023 में मिलिट्री इंटेलिजेंस में शामिल होने के बाद से रोबोटिक डॉग्स का परीक्षण कई अभियानों में पूरा हो चुका है और इन्हें भविष्य की लड़ाकू आवश्यकताओं के अनुरूप देखा जा रहा है।