जैसलमेर

jaisalmer: स्वर्णनगरी में हर माह करीब 150 डॉग-बाइट के मामले, वर्ष -2030 के लक्ष्य की जमीनी परीक्षा शुरू

जैसलमेर में आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या अब जनसुरक्षा के साथ रेबीज नियंत्रण की चुनौती बन रही है। राजकीय अस्पताल में रोज औसतन पांच डॉग-बाइट मामले सामने आने से महीने में करीब 150 पीड़ित पहुंच रहे हैं। पर्यटन क्षेत्रों तक श्वानों के झुंड पहुंचने से स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों की सुरक्षा पर भी चिंता बढ़ी है।
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Sep 29, 2026
jaisalmer news
जैसलमेर के स्वच्छन्द घूमते आवारा श्वान, बढ़ते डॉग-बाइट मामलों के बीच रोकथाम बड़ी चुनौती।

जैसलमेर. पर्यटननगरी में आवारा श्वानों की बढ़ती संख्या अब केवल जनसुरक्षा का सवाल नहीं है। यह भारत के 2030 तक कुत्तों से फैलने वाली रेबीज से मानव मृत्यु शून्य करने के लक्ष्य की स्थानीय परीक्षा भी है। राजकीय अस्पताल में रोज औसतन पांच डॉग-बाइट मामले सामने आने की जानकारी है। यानी महीने में करीब 150 पीड़ित सामने आते हैं।

शहर की मुख्य सड़कों, मोहल्लों, बाजारों और पर्यटन क्षेत्रों में श्वानों के झुंड दिखाई देते हैं। सुबह-शाम इनकी सक्रियता से बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मॉर्निंग वॉक करने वालों में भय रहता है। सोनार दुर्ग जैसे पर्यटन क्षेत्र में यह स्थानीय सुरक्षा के साथ पर्यटक सुरक्षा का विषय भी बन रहा है।

तीन हजार का अनुमान, आंकड़ा अब भी अधूरा

शहरी क्षेत्र में आवारा श्वानों की संख्या करीब 3,000 होने का अनुमान है, लेकिन आधिकारिक गणना उपलब्ध नहीं है। वास्तविक संख्या और क्षेत्रवार वितरण पता नहीं होगा तो नसबंदी और टीकाकरण का लक्ष्य भी सटीक नहीं बनाया जा सकता।

स्थानीय लोगों के अनुसार नियमित नसबंदी अभियान लंबे समय से प्रभावी तरीके से नहीं चल रहा। खुले कचरे और भोजन की उपलब्धता से भी श्वानों के झुंड बढ़ रहे हैं। समस्या का स्थायी समाधान केवल पकड़ने की कार्रवाई से नहीं, बल्कि आबादी नियंत्रण और कचरा प्रबंधन से जुड़े कदमों से होगा।

राजस्थान में 2021-22 से 2025-26 के बीच 18,42,617 डॉग-बाइट मामले दर्ज हुए। 2025-26 में ही संख्या 5,93,999 रही। जैसलमेर का रोजाना डॉग-बाइट आंकड़ा इसी बड़े परिदृश्य में जिले की स्थिति समझने का आधार बनता है। राष्ट्रीय रेबीज उन्मूलन रणनीति में जोखिम वाले क्षेत्रों में कम से कम 70 प्रतिशत कुत्तों के टीकाकरण को महत्वपूर्ण माना गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानव रेबीज संक्रमण का बड़ा हिस्सा संक्रमित कुत्तों से जुड़ा है।

रेबीज रोकथाम की पूरी चेन

पशुपालन: कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी।

नगरपरिषद: खुले कचरे और खाद्य स्रोतों पर नियंत्रण।

स्वास्थ्य विभाग: डॉग-बाइट के बाद तत्काल उपचार, वैक्सीन और सीरम की उपलब्धता।

पर्यटन तंत्र: प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा और त्वरित सहायता की व्यवस्था।

प्रशासन: श्वान गणना, डॉग-बाइट, टीकाकरण और नसबंदी का साझा डेटा।

जैसलमेर में पांच काम जरूरी

- वार्डवार श्वान गणना हो

- क्षेत्रवार डॉग-बाइट रिकॉर्ड

- टीकाकरण का वास्तविक प्रतिशत

- नसबंदी की संख्या और कवरेज

- खुले कचरे वाले हॉटस्पॉट की मैपिंग

- पर्यटन स्थलों पर जोखिम की निगरानी

- अस्पतालों में वैक्सीन और इम्युनोग्लोब्युलिन की उपलब्धता

जन जागरण की भी दरकार

डॉग-बाइट के मामलों में लोगों को जागरूक रहना जरूरी है। कुत्ते के काटने या खरोंच लगने पर घाव को तुरंत साबुन-पानी से अच्छी तरह धोकर अस्पताल पहुंचना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटी रेबीज वैक्सीन की व्यवस्था की जाती है। इस समस्या के समाधान के लिए नगरपरिषद सहित संबंधित विभागों के साथ समन्वय जरूरी है।

- डॉ एमडी सोनी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जैसलमेर का वर्जन

कर रहे समस्या समाधान

आवारा श्वानों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए उनकी नसबंदी और टीकाकरण का कार्य करवाया जा रहा है। नगरपरिषद स्तर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार जरूरी कदम उठाए जा रहे है। श्वानों की संख्या और क्षेत्रवार स्थिति का आंकलन कर आगे की कार्ययोजना क्रियान्वित की जाएगी।

- पवन कुमार, आयुक्त, नगरपरिषद जैसलमेर

Updated on:
29 Sept 2026 07:45 pm
Published on:
29 Sept 2026 07:45 pm