स्वर्णनगरी में इस बार गर्मी केवल मौसम तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने शहर की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी बदलनी शुरू कर दी है।
स्वर्णनगरी में इस बार गर्मी केवल मौसम तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने शहर की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार भी बदलनी शुरू कर दी है। लगातार 45 से 46 डिग्री तक पहुंचते तापमान के बीच शहर में नया हीट माइग्रेशन ट्रेंड उभरने लगा है। अस्थायी निवासी और किराएदार परिवार गर्मी के चरम महीनों में ठंडे शहरों की ओर अस्थायी रूप से रुख कर रहे हैं। मई के पहले सप्ताह से ही इसका असर स्थानीय बाजार, होटल व्यवसाय और पर्यटन गतिविधियों पर दिखाई देने लगा। कई परिवार जैसलमेर छोड़कर माउंट आबू, उदयपुर, देहरादून और हिमालयी क्षेत्रों के ठंडे शहरों में कुछ सप्ताह या महीनों के लिए रहने पहुंच रहे हैं।
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार इस बार गर्मी बढ़ते ही बाजारों में ग्राहकों की संख्या तेजी से घटी है। विशेष रूप से शाम के समय सक्रिय रहने वाले कैफे, रेस्टोरेंट और हस्तशिल्प दुकानों में फुटफॉल कम हुआ है।
-किराए के मकान अस्थायी रूप से खाली होने लगे
-रेस्टोरेंट और कैफे की बिक्री प्रभावित हुई
-टैक्सी और स्थानीय पर्यटन कारोबार धीमा पड़ा
-देर रात तक सक्रिय रहने वाले बाजार जल्दी सूने होने लगे
व्यापारी महेश सोनी बताते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मई में ग्राहक संख्या करीब 30 प्रतिशत तक घटी है। गर्मी बढ़ने के साथ स्थानीय खरीदारी और पर्यटक गतिविधियां दोनों प्रभावित हुई हैं। गर्मी के असर को देखते हुए कई होटल और होम-स्टे संचालकों ने समर लॉन्ग स्टे डिस्काउंट शुरू किया है। कुछ होटल 15 से 30 दिन तक ठहरने वाले मेहमानों को विशेष पैकेज और रियायती किराया उपलब्ध करा रहे हैं।
होटल व्यवसायी जितेंद्रसिंह का कहना है कि ऑफ-सीजन में कमरों की ऑक्यूपेंसी लगातार घट रही थी। अब होटल उद्योग कम अवधि के पर्यटकों के बजाय लंबे समय तक रुकने वाले ग्राहकों पर फोकस कर रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि लगातार बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन का असर अब लोगों की जीवनशैली पर साफ दिखाई देने लगा है। लोग गर्मी के चरम समय में कुछ समय ठंडे क्षेत्रों में बिताना अधिक सुविधाजनक मान रहे हैं।
पर्यटन और शहरी व्यवहार विशेषज्ञ डॉ. राजीव शर्मा के अनुसार रेगिस्तानी शहरों में सीजनल अर्बन माइग्रेशन आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है। यदि शहरों में बेहतर कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित क्षेत्र और क्लाइमेट फ्रेंडली सार्वजनिक सुविधाएं विकसित नहीं हुईं, तो गर्मी के महीनों में आर्थिक गतिविधियों पर असर और गहरा होगा।
उनका कहना है कि जैसलमेर जैसे पर्यटन आधारित शहरों को अब बदलती जलवायु के अनुसार नई शहरी रणनीतियां तैयार करनी होंगी, ताकि बाजार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था संतुलित बनी रहे।