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एमसीएच यूनिट में ‘खुली एंट्री’, प्रसूताओं के कक्ष में घूम रहे पुरुष

सबसे संवेदनशील माने जाने वाले इस यूनिट में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर मिली। प्रसूताओं और नवजात शिशुओं वाले वार्डों तक बाहरी लोगों की आवाजाही बेरोकटोक जारी रही। किसी भी व्यक्ति से पूछताछ या पहचान संबंधी जांच नहीं हुई। कई पुरुष प्रसूताओं के वार्डों के भीतर बैठे दिखाई दिए, जबकि लेबर रूम के बाहर महिलाएं फर्श पर बैठी मिलीं।

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जैसलमेर. लेबर रूम के बाहर फर्श पर बैठी महिलाएं और नजर आ रहे खून के धब्बे। पत्रिका

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में लगातार सामने आ रही लापरवाही और सुरक्षा चूक की घटनाओं के बीच सोमवार को राजस्थान पत्रिका टीम ने जवाहिर चिकित्सालय स्थित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य इकाई (एमसीएच यूनिट) का जायजा लिया तो हालात निराशाजनक मिले।

सबसे संवेदनशील माने जाने वाले इस यूनिट में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर मिली। प्रसूताओं और नवजात शिशुओं वाले वार्डों तक बाहरी लोगों की आवाजाही बेरोकटोक जारी रही। किसी भी व्यक्ति से पूछताछ या पहचान संबंधी जांच नहीं हुई। कई पुरुष प्रसूताओं के वार्डों के भीतर बैठे दिखाई दिए, जबकि लेबर रूम के बाहर महिलाएं फर्श पर बैठी मिलीं। वहां खून के धब्बे भी नजर आए, जिसने व्यवस्थाओं की गंभीर तस्वीर सामने रख दी। यूनिट के प्रवेश द्वार पर बिना अनुमति प्रवेश निषेध के बोर्ड तो लगे मिले, लेकिन उनका असर जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दिया। अस्पताल परिसर में सुरक्षा गार्ड तक नजर नहीं आया। कोई भी व्यक्ति सीधे वार्ड क्षेत्रों तक पहुंचता रहा। प्रदेश भर में अस्पतालों से बच्चा चोरी और महिलाओं से जुड़े अपराधों की घटनाएं सामने आने के बावजूद यहां सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित दिखाई दी।

भीषण गर्मी में व्यवस्थाओं को ‘लू’

भीषण गर्मी के बीच सबसे चिंताजनक स्थिति पीने के पानी को लेकर मिली। पहली और दूसरी मंजिल पर संचालित एमसीएच यूनिट में लगा वाटर कूलर बंद पड़ा था। उसमें पानी की सप्लाई नहीं होने से प्रसूताओं और उनके परिजनों को एक-दो मंजिल नीचे उतरकर बाहर दुकानों से पानी खरीदना पड़ा। करीब 46 डिग्री से ऊपर तापमान के बीच पानी जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव लोगों की परेशानी बढ़ाता नजर आया। शौचालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली। कई स्थानों पर पानी की आपूर्ति बंद थी। मरीजों के परिजनों ने बताया कि बार-बार बाहर से पानी लाना पड़ रहा है। लेबर रूम के बाहर बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से महिलाएं लंबे समय तक फर्श पर बैठी रहीं।

हकीकत यह भी

अस्पताल प्रशासन ने यूनिट में जेबकतरों और लपका तत्वों से सावधान रहने वाले पोस्टर लगा रखे हैं, लेकिन वास्तविक सुरक्षा इंतजाम लगभग गायब मिले। संवेदनशील क्षेत्रों में कोई निगरानी व्यवस्था नहीं दिखी। इससे प्रसूताओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। केवल कुछ वार्डों के भीतर गर्मी से राहत के इंतजाम ठीक मिले। एयरकंडीशनर, कूलर और पंखे संचालित मिले। एक एसी बंद था, जिसकी जगह कूलर लगाया गया था। वहां भर्ती महिला मरीजों ने बताया कि यूनिट में नियमित सफाई करवाई जाती है। बाहरी परिसर और वार्ड क्षेत्रों में सामान्य साफ-सफाई ठीक मिली, लेकिन सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं की कमी ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।

सुरक्षा के माकूल इंतजाम नहीं

-एमसीएच यूनिट में प्रसूति और नवजात सेवाएं संचालित

-पहली और दूसरी मंजिल पर संचालित पूरा सेटअप

-46 डिग्री से अधिक तापमान के बीच पानी संकट

-सुरक्षा गार्ड और पूछताछ व्यवस्था नहीं मिली

-लेबर रूम बाहर महिलाएं फर्श पर बैठी मिलीं

-शौचालयों में पानी सप्लाई बाधित मिली

प्रोटोकॉल के अनुसार दे रहे सुविधाएं

तय प्रोटोकॉल के अनुसार सुविधाएं व व्यवस्थाएं दे रहे हैं। यदि अस्पताल में कुछ समस्याएं हैं तो जल्द दूर करवाई जाएगी। संवेदनशील वार्डों में बाहरी लोगों की अनावश्यक आवाजाही रोकने के निर्देश दिए जाएंगे। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ निगरानी बढ़ाई जाएगी, ताकि प्रसूताओं और नवजात शिशुओं को सुरक्षित माहौल मिल सके।

—डॉ. रविन्द्र सांखला, प्रमुख चिकित्सा अधिकारी, जैसलमेर