कैसे मिटेगा मरीजों का मर्ज!- उपजिला अस्पताल का तमगा मिला, सुविधाओं का आज भी टोटा
पोकरण. राज्य सरकार की ओर से आमजन को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं व सेवाएं देने के दावे अवश्य किए जा रहे है। दूसरी तरफ पोकरण विधानसभा मुख्यालय पर स्थित क्षेत्र के सबसे बड़े राजकीय अस्पताल में सुविधाओं की कमी से मरीजों को परेशानी हो रही है। गौरतलब है कि वर्षों पुराने पोकरण के सेठ विट्ठलदास राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को समय-समय पर क्रमोन्नत किया जाता रहा है, लेकिन क्रमोन्नति मात्र तमगे के रूप में ही नजर आ रही है। धरातल पर सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है। जिसके कारण मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा व सेवा नहीं मिल पा रही है। गत दिनों सरकार की ओर से अस्पताल को एक और क्रमोन्नति अवश्य दी गई, लेकिन रिक्त पड़े चिकित्सकों के पदों पर नियुक्तियों का मरीज आज भी इंतजार कर रहे है। गत लम्बे समय से चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को उपचार के लिए जोधपुर जाना पड़ रहा है। जिससे उन्हें परेशानी हो रही है। चिकित्सकों व नर्सिंगकर्मियों के रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर सरकार की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
यह है स्थिति
पद स्वीकृत कार्यरत
चिकित्सक 33 11
नर्सिंगकर्मी 45 23
स्वीपर 17 03
एएनएम व एलएचवी 7 03
फार्मासिस्ट 5 1
700 की ओपीडी, 10 प्रसव
पोकरण के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में आसपास क्षेत्र के गांवों व ढाणियों से प्रतिदिन मरीज अपने उपचार के लिए पहुंचते है। राजकीय अस्पताल की प्रतिदिन की ओपीडी 600 से 700 की है तथा इनडोर में हर समय 80 से 100 मरीज भर्ती रहते है। इसी प्रकार पोकरण कस्बे सहित आसपास क्षेत्र से प्रतिदिन आठ से दस गर्भवती महिलाओं के प्रसव भी करवाए जाते है। इन सब के बावजूद यहां कार्यरत चिकित्सकों की संख्या नाममात्र की साबित हो रही है। उसमें भी एक चिकित्सक परिवार कल्याण कार्यक्रम, एक चिकित्सक साप्ताहिक अवकाश, दो चिकित्सक दिन व रात की ड्यूटी, एक चिकित्सक न्यायालय पेशी व सरकारी बैठकों में व्यस्त रहते है। ऐसे में आधा दर्जन चिकित्सकों के लिए रोज की 700 की ओपीडी को संभालना मुश्किल हो जाता है। यही नहीं पोकरण दो राष्ट्रीय राजमार्गों के बीच स्थित है तथा पास ही पोकरण फिल्ड फायरिंग रेंज भी है। ऐसे में आए दिन सड़क व अन्य हादसों में होने वाले घायलों को भी इसी अस्पताल लाया जाता है। जिससे कार्यभार बढ़ जाता है।
150 बैड के अस्पताल में सुविधाएं 50 बैड की
पोकरण का राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र क्रमोन्नति मिलते-मिलते उपजिला अस्पताल तक पहुंच गया है। जिससे यहां 150 बैड के अस्पताल की सुविधाएं होनी चाहिए। जबकि भौतिक रूप से यहां मात्र 50 बैड की सुविधाएं ही मिल रही है। चिकित्सकों व नर्सिंगकर्मियों की कमी के कारण गंभीर बीमार मरीजों, हादसों में घायलों को जोधपुर रैफर करना चिकित्सकों की मजबूरी हो गया है। बावजूद इसके सरकार की ओर से यहां सुविधाओं के विस्तार को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।