भारत-पाकिस्तान की सीमा पर बसे जैसलमेर जिले में उच्चस्तरीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं आज तक एक सपना ही बनी हुई हैं। जिला अस्पताल जवाहिर चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों का वर्षों से टोटा चल रहा है। जिसके कारण गंभीर रोगों का उपचार करवाने के लिए जोधपुर या किसी अन्य शहर जाना विवशता बना हुआ है।
भारत-पाकिस्तान की सीमा पर बसे जैसलमेर जिले में उच्चस्तरीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं आज तक एक सपना ही बनी हुई हैं। जिला अस्पताल जवाहिर चिकित्सालय में विशेषज्ञ चिकित्सकों का वर्षों से टोटा चल रहा है। जिसके कारण गंभीर रोगों का उपचार करवाने के लिए जोधपुर या किसी अन्य शहर जाना विवशता बना हुआ है। अब सीमांत जिलावासियों की सारी उम्मीदें रामगढ़ बाइपास पर बन रहे मेडिकल कॉलेज और 345 बेड्स वाले नए जिला अस्पताल पर टिकी हुई हैं। ये दोनों कार्य 31 मार्च, 2025 तक पूरे होने का लक्ष्य निर्धारित है। जानकारी के अनुसार 150 सीटें प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के लिए निर्धारित है। इसका मतलब यह है कि आज चिकित्सकों के लिए तरस रहे जैसलमेर में आने वाले कल में चिकित्सक तैयार होंगे। मेडिकल कॉलेज के लिए पहले चरण में 159 करोड़ रुपए की लागत से कार्य करवाया जा रहा है और एकेडमिक ब्लॉक्स सहित अन्य निर्माण तेजी से हो रहे हैं। साथ ही अस्पताल का कार्य भी शुरू है। जिस पर करीब 110 करोड़ रुपए की लागत आएगी। गौरतलब है कि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से संयुक्त तौर पर इन निर्माण कार्यों के लिए 325 करोड़ रुपए खर्च करने का निर्णय किया हुआ है। जैसलमेर में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत के लिए जरूरी लाइसेंस जारी करवाने की कवायद की जाएगी। जिम्मेदारों की मानें तो यहां अगले सत्र से मेडिकल के विद्यार्थियों का प्रवेश व अध्ययन कार्य शुरू हो जाएगा।
गत वर्ष जुलाई के आखिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के सीकर शहर से वर्चुअल तौर पर अन्य कई विकास कार्यों के साथ जैसलमेर के रामगढ़ मार्ग पर बनने वाले मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था।