
रामदेवरा ( जैसलमेर ) थार के दुर्लभ और संकटग्रस्त राज्य पक्षी गोडावण को उसके प्राकृतिक आवास में फिर बसाने की दिशा में शनिवार को अहम कदम उठाया गया। रामदेवरा स्थित गोडावण कंजर्वेशन एवं ब्रीडिंग सेंटर में नवनिर्मित रीवाइल्डिंग एवियरी का उद्घाटन हुआ। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जोधपुर से वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े, जबकि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव रामदेवरा में मौजूद रहे। वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री संजय शर्मा सहित केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी, वैज्ञानिक तथा संरक्षण विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
गोडावण संरक्षण कार्यक्रम अब संरक्षण प्रजनन से आगे बढ़कर रीवाइल्डिंग के चरण में पहुंच गया है। करीब एक दशक तक संरक्षण प्रजनन, वैज्ञानिक अनुसंधान, कृत्रिम प्रजनन, व्यवहार अध्ययन और सुरक्षित पालन पर काम किया गया। अब कैप्टिव-ब्रेड गोडावणों को प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल बनाने और धीरे-धीरे उनके प्राकृतिक आवास में वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। शनिवार को रामदेवरा की सॉफ्ट-रिलीज सुविधा से दो कैप्टिव-ब्रेड गोडावणों को प्राकृतिक आवास में भेजने की प्रक्रिया शुरू हुई। रविवार को जैसलमेर स्थित डेजर्ट नेशनल पार्क में इन्हें प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इसके साथ गोडावण संरक्षण कार्यक्रम ब्रीडिंग से रीवाइल्डिंग के चरण में प्रवेश कर गया है।
रामदेवरा में तैयार रीवाइल्डिंग एवियरी करीब 160 मीटर लंबी, 64 मीटर चौड़ी और 14 मीटर ऊंची है। राजस्थान वन विभाग ने इसे राजस्थान स्टेट रोड डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से तैयार कराया है। एवियरी में गोडावणों को मानव संपर्क से दूर रखते हुए प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यवहार विकसित करने पर जोर रहेगा। इसका उद्देश्य पक्षियों को खुले प्राकृतिक आवास में जीवन के लिए तैयार करना है।
प्राकृतिक आवास में पहुंचने के बाद गोडावणों की गतिविधियों, आवास के उपयोग, व्यवहार और जीवित रहने की क्षमता की वैज्ञानिक निगरानी होगी। इसके लिए सैटेलाइट टैगिंग सहित आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। निगरानी से विशेषज्ञ यह समझ सकेंगे कि संरक्षण प्रजनन से तैयार गोडावण प्राकृतिक वातावरण में किस तरह अनुकूलन करते हैं। इनके व्यवहार और आवास उपयोग से भविष्य की रीवाइल्डिंग रणनीति तैयार करने में भी मदद मिलेगी।
गोडावण संरक्षण कार्यक्रम के तहत जैसलमेर के सम और रामदेवरा में संरक्षण प्रजनन सुविधाएं विकसित की गईं। अंडों के संरक्षण, कृत्रिम प्रजनन, व्यवहार अध्ययन, आवास निगरानी, टेलीमेट्री और वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए सुरक्षित आबादी तैयार करने पर काम किया गया। केंद्र सरकार की जानकारी के अनुसार जून 2026 तक संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम में कैप्टिव स्टॉक की संख्या 94 पक्षियों तक पहुंच गई थी। अब इसी संरक्षण प्रयास का अगला चरण प्राकृतिक आवास में वापसी है।
गोडावण संरक्षण को थार की घासभूमि और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण से जोड़कर देखा जा रहा है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कार्यक्रम में गोडावण संरक्षण के साथ घासभूमि संरक्षण, भूमि क्षरण रोकने और प्रवासी पक्षियों के आवागमन से जुड़े पहलुओं को रेखांकित किया। उन्होंने स्थानीय समुदायों के लिए इको-टूरिज्म से आर्थिक अवसरों की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। रामदेवरा में विकसित संरक्षण केंद्र अब गोडावण की सुरक्षित आबादी तैयार करने के साथ उसकी जंगल में वापसी की प्रक्रिया का आधार बन रहा है। शनिवार को शुरू हुआ यह चरण सफल रहता है तो थार के प्राकृतिक आवास में गोडावण की आबादी मजबूत करने के अगले प्रयासों के लिए आधार तैयार होगा।