जैसलमेर

रेगिस्तान में बदलता मौसम चक्र… किसानों की चिंता और जोखिम दोनों बढ़े

कभी बारिश का इंतजार करने वाला रेगिस्तानी इलाका अब मौसम के दूसरे छोर की चुनौती झेल रहा है। पश्चिमी राजस्थान के पोकरण क्षेत्र में बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है।

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May 23, 2026
photo patrika

कभी बारिश का इंतजार करने वाला रेगिस्तानी इलाका अब मौसम के दूसरे छोर की चुनौती झेल रहा है। पश्चिमी राजस्थान के पोकरण क्षेत्र में बारिश का पैटर्न तेजी से बदल रहा है। बरसात का बढ़ता आंकड़ा जहां भूजल, पशुपालन और कृषि के लिए राहत बनकर आया, वहीं अब यही बदलाव किसानों के लिए नई चिंता भी तैयार कर रहा है। मानसून की तय सीमाएं कमजोर पड़ रही हैं और मौसम अब कैलेंडर की बजाय अपने नए व्यवहार से काम करता दिख रहा है। बीते सात वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र में बारिश का स्वरूप केवल बढ़ा नहीं है, बल्कि उसका वितरण भी बदल गया है।

पहले कम बारिश और अकाल चर्चा में रहते थे, अब बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि नुकसान की वजह बन रहे हैं। मार्च-अप्रेल में हुई बारिश ने खड़ी फसलों से लेकर कटाई के बाद खेतों में रखी उपज तक प्रभावित की।मानसून शुरू होने से पहले ही 44 एमएम बारिश दर्ज होना मौसम वैज्ञानिक संकेतों में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

डेटा डेस्क : बारिश के आंकड़ों में बड़ा बदलाव

► वर्ष 2018 : 159 एमएम

► वर्ष 2019 : 271 एमएम

► वर्ष 2020 : 455 एमएम

► वर्ष 2021 : 423 एमएम

► वर्ष 2022 : 345 एमएम

► वर्ष 2023 : 527 एमएम

► वर्ष 2024 : 641 एमएम

► वर्ष 2025 : 562 एमएम

हकीकत यह भी

सिर्फ सात वर्षों में बारिश लगभग चार गुना तक बढ़ती दिखाई दी। वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2024 में करीब 300 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज हुई। यह बदलाव रेगिस्तानी क्षेत्र के पारंपरिक मौसम ढांचे से अलग तस्वीर पेश करता है।

किसानों की चिंता : पानी चाहिए, लेकिन समय पर चाहिए

खेती के लिए पानी हमेशा जरूरी रहा है, लेकिन अब चुनौती पानी की उपलब्धता नहीं बल्कि उसके समय की बन गई है। बुआई के बाद फसल बढ़ने और पकने के दौरान अचानक बारिश होने से खेतों में नमी असंतुलन, दाने की गुणवत्ता में कमी और कटाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है। ओलावृष्टि ने नुकसान का जोखिम और बढ़ा दिया है।

इस वर्ष की शुरुआती तस्वीर

► जनवरी : 5 एमएम

► मार्च : 4 एमएम

► अप्रेल : 25 एमएम

► मई : 10 एमएम

► कुल बारिश : 44 एमएम

एक नजर : बदलता मौसम, बदलती जमीन

► अकाल की चर्चा से बेमौसम बारिश की चर्चा तक बदलाव

► नहरी क्षेत्र के विस्तार से कृषि गतिविधियां बढ़ीं

► बारिश बढ़ी, लेकिन मौसम की स्थिरता घटी

► खेती की लागत और जोखिम दोनों बढ़े

एक्सपर्ट व्यू: समय और तीव्रता बदल जाए तो कृषि पर असर अधिक

जलवायु और मौसम विश्लेषक डॉ. आरएस चौधरी का कहना है कि रेगिस्तानी क्षेत्रों में बारिश का कुल आंकड़ा बढ़ना सकारात्मक संकेत लग सकता है, लेकिन यदि बारिश का समय और तीव्रता बदल जाए तो कृषि पर असर अधिक पड़ता है। भविष्य में फसल चयन, बीमा सुरक्षा और मौसम आधारित खेती मॉडल पर ज्यादा काम करना होगा।

Published on:
23 May 2026 08:22 pm
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