
पोकरण में भारत के ‘वायु अस्त्र-1’ का सफल टेस्ट (पत्रिका फोटो)
जैसलमेर: भारत की रक्षा तकनीक में एक नया मोड़ तब दर्ज हुआ, जब स्वदेशी वायु अस्त्र-1 लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम ने अलग-अलग भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में अपनी बहुस्तरीय क्षमता साबित की। यह ड्रोन परीक्षण के साथ-साथ आधुनिक युद्ध प्रणाली में स्वायत्त, सटीक और नेटवर्क आधारित स्ट्राइक क्षमता का संकेत माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, गत 18 अप्रैल को राजस्थान के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में रेतीले और गर्म वातावरण के बीच इसका रेगिस्तानी परीक्षण किया गया। इस दौरान ड्रोन ने 100 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को पहली ही उड़ान में भेद दिया। इस दौरान 10 किलोग्राम विस्फोटक पेलोड के साथ इसने सर्कुलर एरर प्रोबेबल यानी सीईपी एक मीटर से कम दर्ज किया, जो प्रिसिशन वेपन सिस्टम की उच्च श्रेणी में आता है।
कठिन हवाओं और अस्थिर रेतीले वातावरण में भी इसकी नेविगेशन प्रणाली स्थिर रही। इसके अलावा गत 19 अप्रैल को उत्तराखंड के जोशीमठ मलारी क्षेत्र में 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर इसका हाई एल्टीट्यूड परीक्षण हुआ। शून्य से नीचे तापमान और कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी ड्रोन ने स्थिर उड़ान और नियंत्रण क्षमता बनाए रखी।
यह सिस्टम केवल रेगिस्तान ही नहीं, बल्कि पर्वतीय युद्ध परिदृश्य में भी प्रभावी भूमिका निभा सकता है। स्मार्ट मिशन कंट्रोल इस सिस्टम की सबसे उन्नत तकनीकी विशेषता के रूप में उभरा है। यह उड़ान के दौरान लक्ष्य बदलने, मिशन रोकने या नए टारगेट पर स्विच करने की क्षमता प्रदान करता है।
रात्रि परीक्षण में इन्फ्रारेड सेंसर तकनीक की मदद से अंधेरे में छिपे बख्तरबंद लक्ष्यों की पहचान और सटीक प्रहार क्षमता भी सफल रही। यह इसे 24 घंटे तैयार रहने वाला ऑपरेशनल कॉम्बैट सिस्टम बनाता है, जो दिन और रात दोनों परिस्थितियों में समान रूप से प्रभावी है। यह तकनीक भारत को 'ऑटोनॉमस प्रिसिशन स्ट्राइक इकोसिस्टम' की दिशा में आगे ले जाती है।
Published on:
23 May 2026 08:44 am
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