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गड़ीसर की एंट्री पर बैरियर, ट्रैफिक कंट्रोल के साथ उभरे नए सवाल भी

जैसलमेर शहर के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में शामिल गड़ीसर सरोवर के प्रवेश मार्ग पर लगाए गए पत्थर के पिलर्स ने सिर्फ वाहनों की आवाजाही नहीं रोकी, बल्कि शहरी प्रबंधन, पर्यटन नियंत्रण और आपातकालीन पहुंच को लेकर नई बहस भी शुरू कर दी है।

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जैसलमेर। गड़ीसर सरोवर मार्ग पर वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने के लिए लगाए गए पत्थर पिलर्स।

जैसलमेर शहर के सबसे चर्चित पर्यटन स्थलों में शामिल गड़ीसर सरोवर के प्रवेश मार्ग पर लगाए गए पत्थर के पिलर्स ने सिर्फ वाहनों की आवाजाही नहीं रोकी, बल्कि शहरी प्रबंधन, पर्यटन नियंत्रण और आपातकालीन पहुंच को लेकर नई बहस भी शुरू कर दी है। नगरपरिषद ने करीब दस पत्थर के पिलर्स लगाकर चारपहिया और तिपहिया वाहनों की एंट्री सीमित करने की कवायद शुरू की है।

मकसद पर्यटन सीजन में बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव, अव्यवस्थित पार्किंग और अवांछनीय गतिविधियों पर नियंत्रण रखना बताया जा रहा है। पिलर्स के बीच इतना ही स्थान छोड़ा गया है कि पैदल यात्री और मुश्किल से दुपहिया वाहन निकल सकें। जैसे ही यह व्यवस्था लागू हुई, गड़ीसर क्षेत्र में रहने वाले परिवारों और आसपास की बगेचियों से जुड़े लोगों ने सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी।

यूं स्थिति को समझिए

-करीब 10 पत्थर पिलर्स लगाए गए

- चारपहिया और तिपहिया वाहनों की एंट्री सीमित

- दुपहिया और पैदल आवागमन आंशिक रूप से संभव

- हाल में करोड़ों रुपए की लागत से हुआ है पाल विस्तार कार्य

- पर्यटन सीजन में बड़ी संख्या में वाहनों का रहता है दबाव

-स्थानीय लोगों ने एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड न पहुंचने को लेकर जताई चिंता

पाल विस्तार, सौंदर्यीकरण और लाइटिंग का कार्य

ऐतिहासिक गड़ीसर सरोवर के समीप आरयूआइडीपी परियोजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च कर पाल विस्तार, सौंदर्यीकरण और लाइटिंग का कार्य किया गया। उद्देश्य यह था कि पर्यटक और स्थानीय लोग मॉर्निंग वॉक, इवनिंग वॉक और पर्यटन गतिविधियों का बेहतर अनुभव ले सकें। ऐसे में क्षेत्र का उपयोग बढ़ने के साथ सुरक्षा और नियंत्रण का मुद्दा भी सामने आना स्वाभाविक माना जा रहा है।

हकीकत यह भी

शहर के कई खुले इलाकों में रात के समय शराब सेवन और कांच की बोतलें फेंके जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में वाहन आधारित अवांछित गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि किसी घर में स्वास्थ्य आपात स्थिति बनी या आग लगने जैसी घटना हुई तो तत्काल राहत वाहन वहां कैसे पहुंचेंगे ?

स्मार्ट बैरियर या नियंत्रित प्रवेश प्रणाली अधिक प्रभावी

शहरी नियोजन विशेषज्ञों के अनुसार पर्यटन स्थलों पर वाहन नियंत्रण का मॉडल नई अवधारणा नहीं है, लेकिन दुनिया के कई शहरों में इसके साथ इमरजेंसी एक्सेस कॉरिडोर भी तैयार किए जाते हैं। स्थायी अवरोधों के स्थान पर हटाए जा सकने वाले स्मार्ट बैरियर या नियंत्रित प्रवेश प्रणाली अधिक प्रभावी मानी जाती है। इससे सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।

आपातकाल को लेकर करेंगे व्यवस्था

गड़ीसर क्षेत्र में वाहनों का जमावड़ा रोकने और वाहनों पर संचालित होने वाली मूवेबल थड़ियों पर नियंत्रण के लिए पत्थर पिलर्स लगाए गए हैं। साथ ही आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पानी के टैंकरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अलग व्यवस्था तैयार की जाएगी।

- लजपालसिंह सोढ़ा, आयुक्त, नगरपरिषद, जैसलमेर