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नहरबंदी का टेंशन खत्म! जैसलमेर-बाड़मेर के बीच बनी 28 KM लंबी जल संरचना, 50 लाख लोगों को मिलेगा स्थिर पानी

थार के रेगिस्तान में जल संकट से राहत के लिए 28 किमी लंबा जिगजैग वाटर बैकअप नेटवर्क तैयार किया गया है। 1413 मिलियन क्यूबिक फीट क्षमता वाली यह संरचना नहरबंदी के दौरान जैसलमेर-बाड़मेर की करीब 50 लाख आबादी को सालभर पानी उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
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जैसलमेर

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Arvind Rao

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Updated: 22 May 2026, 2:30 PM IST

Jaisalmer-Barmer Mega Water Project

थार के रेगिस्तान में बना विशाल कृत्रिम जल भंडार! 28 किमी लंबी संरचना (फोटो-एआई)

जैसलमेर/बाड़मेर: थार के रेगिस्तान में पानी को लेकर अब एक नई कहानी लिखी जा रही है। यहां पानी लाने से ज्यादा बड़ी चुनौती उसे सुरक्षित रखने की रही है। हर साल इंदिरा गांधी नहर की नहरबंदी के दौरान जैसलमेर और बाड़मेर के कई इलाकों में जल आपूर्ति पर असर दिखाई देता रहा है। अब इस चुनौती से निपटने के लिए रेगिस्तान के बीच एक विशाल कृत्रिम जल भंडारण प्रणाली तैयार की गई है, जिसे क्षेत्र के जल सुरक्षा मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियंता रामपाल मूंधियाड़ा के अनुसार, नहरबंदी के समय जल संकट की स्थिति को देखते हुए वर्ष 2024 में इस परियोजना पर काम शुरू हुआ था। उद्देश्य ऐसा बड़ा जल बैकअप सिस्टम तैयार करना था, जहां अतिरिक्त पानी को संग्रहित कर जरूरत पड़ने पर उपयोग में लिया जा सके।

करीब 28 किलोमीटर लंबी यह जिगजैग जल संरचना जमीन के भीतर लगभग 10 मीटर यानी 33 फीट गहराई तक विकसित की गई है। इसकी कुल जल भंडारण क्षमता 1413 मिलियन क्यूबिक फीट रखी गई है। विभागीय अनुमान के अनुसार, यह संरचना जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र की लगभग 50 लाख आबादी के लिए वर्षभर जल आपूर्ति को स्थिर रखने में सहायक बन सकती है।

उक्त परियोजना केवल आकार के कारण अलग नहीं है, बल्कि तकनीकी संरचना भी इसकी विशेषता मानी जा रही है। रेतीली मिट्टी पानी को तेजी से नीचे खींचती है। ऐसे में पूरे बेस क्षेत्र में 300 माइक्रोन हाईडेंसिटी पॉलीथिलीन लाइनिंग बिछाई गई है। इसके ऊपर लगभग 80 सेंटीमीटर मिट्टी की परत डाली गई है, ताकि पानी का रिसाव रोका जा सके और संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।

परियोजना पर नजर

  • कुल लंबाई: 28 किलोमीटर
  • गहराई: लगभग 33 फीट
  • बेस एरिया: 71 लाख वर्ग मीटर
  • लाइनिंग क्षेत्र: 76 लाख वर्ग मीटर
  • भंडारण क्षमता: 1413 मिलियन क्यूबिक फीट
  • संभावित लाभार्थी: करीब 50 लाख लोग
  • निर्माण में शामिल टीम: 400 श्रमिक और 10 इंजीनियर

पाइपलाइन नेटवर्क से जैसलमेर और बाड़मेर तक होगी आपूर्ति

मानसून के दौरान पंजाब और हिमाचल प्रदेश क्षेत्रों में अधिक बारिश होने पर इंदिरा गांधी नहर में अतिरिक्त जल प्रवाह आता है। सामान्य परिस्थितियों में यह पानी आगे बह जाता था, लेकिन अब करीब एक किलोमीटर लंबे एस्केप चैनल के जरिए अतिरिक्त पानी को इस संरचना तक पहुंचाया जाएगा।

जल संग्रहण के बाद इंटेक सिस्टम से पानी बड़े पाइपों के जरिए मोहनगढ़ फिल्टर प्लांट पहुंचेगा। शुद्धिकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद पाइपलाइन नेटवर्क से जैसलमेर और बाड़मेर तक सप्लाई की जाएगी।

यह भी होगा लाभ

  • अतिरिक्त जल को संरक्षित कर आवश्यकता के समय उपयोग करने का मॉडल जल आपूर्ति नेटवर्क को स्थिरता देगा।
  • भविष्य में इस तरह की संरचनाएं शुष्क क्षेत्रों के लिए प्रभावी समाधान बन सकती हैं।
  • रेगिस्तान के बीच तैयार यह संरचना बदलते जल प्रबंधन की एक नई प्रयोगशाला के रूप में देखी जा रही है।