
थार के रेगिस्तान में बना विशाल कृत्रिम जल भंडार! 28 किमी लंबी संरचना (फोटो-एआई)
जैसलमेर/बाड़मेर: थार के रेगिस्तान में पानी को लेकर अब एक नई कहानी लिखी जा रही है। यहां पानी लाने से ज्यादा बड़ी चुनौती उसे सुरक्षित रखने की रही है। हर साल इंदिरा गांधी नहर की नहरबंदी के दौरान जैसलमेर और बाड़मेर के कई इलाकों में जल आपूर्ति पर असर दिखाई देता रहा है। अब इस चुनौती से निपटने के लिए रेगिस्तान के बीच एक विशाल कृत्रिम जल भंडारण प्रणाली तैयार की गई है, जिसे क्षेत्र के जल सुरक्षा मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
जलदाय विभाग के अधिशाषी अभियंता रामपाल मूंधियाड़ा के अनुसार, नहरबंदी के समय जल संकट की स्थिति को देखते हुए वर्ष 2024 में इस परियोजना पर काम शुरू हुआ था। उद्देश्य ऐसा बड़ा जल बैकअप सिस्टम तैयार करना था, जहां अतिरिक्त पानी को संग्रहित कर जरूरत पड़ने पर उपयोग में लिया जा सके।
करीब 28 किलोमीटर लंबी यह जिगजैग जल संरचना जमीन के भीतर लगभग 10 मीटर यानी 33 फीट गहराई तक विकसित की गई है। इसकी कुल जल भंडारण क्षमता 1413 मिलियन क्यूबिक फीट रखी गई है। विभागीय अनुमान के अनुसार, यह संरचना जैसलमेर और बाड़मेर क्षेत्र की लगभग 50 लाख आबादी के लिए वर्षभर जल आपूर्ति को स्थिर रखने में सहायक बन सकती है।
उक्त परियोजना केवल आकार के कारण अलग नहीं है, बल्कि तकनीकी संरचना भी इसकी विशेषता मानी जा रही है। रेतीली मिट्टी पानी को तेजी से नीचे खींचती है। ऐसे में पूरे बेस क्षेत्र में 300 माइक्रोन हाईडेंसिटी पॉलीथिलीन लाइनिंग बिछाई गई है। इसके ऊपर लगभग 80 सेंटीमीटर मिट्टी की परत डाली गई है, ताकि पानी का रिसाव रोका जा सके और संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रह सके।
मानसून के दौरान पंजाब और हिमाचल प्रदेश क्षेत्रों में अधिक बारिश होने पर इंदिरा गांधी नहर में अतिरिक्त जल प्रवाह आता है। सामान्य परिस्थितियों में यह पानी आगे बह जाता था, लेकिन अब करीब एक किलोमीटर लंबे एस्केप चैनल के जरिए अतिरिक्त पानी को इस संरचना तक पहुंचाया जाएगा।
जल संग्रहण के बाद इंटेक सिस्टम से पानी बड़े पाइपों के जरिए मोहनगढ़ फिल्टर प्लांट पहुंचेगा। शुद्धिकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद पाइपलाइन नेटवर्क से जैसलमेर और बाड़मेर तक सप्लाई की जाएगी।
Published on:
22 May 2026 02:30 pm
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