जैसलमेर

जैन मंदिरों की शिल्पकला देख अभिभूत हुए मुख्य न्यायाधीश

स्वर्णनगरी दुर्ग स्थित जैन मंदिरों को देखकर चैन्नई हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस. भास्कर ने कहा कि स्वर्णनगरी के जैन मंदिर दिव्य स्तांभों से सज्जा, जिन मंदिर का रंग मंडप, तोरण द्वार की अनूठी कारीगरी कि कला व सौंदर्य अपने आप में अनूठी है।
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Aug 30, 2018
jaisalmer
जैन मंदिरों की शिल्पकला देख अभिभूत हुए मुख्य न्यायाधीश

जैसलमेर. स्वर्णनगरी दुर्ग स्थित जैन मंदिरों को देखकर चैन्नई हाईकोर्ट के मु य न्यायाधीश एस. भास्कर ने कहा कि स्वर्णनगरी के जैन मंदिर दिव्य स्तांभों से सज्जा, जिन मंदिर का रंग मंडप, तोरण द्वार की अनूठी कारीगरी कि कला व सौंदर्य अपने आप में अनूठी है। एस. भास्कर व उनके परिवार ने मंदिरो की विशिष्ट वास्तुकला, शिल्प सौदर्य एवं मूर्तिकला को देखकर अभिभूत से हो गए। उन्होंने कहा कि जैसलमेर कला वैभव का अदभूत खजाना है। इसके समूचित संरक्षण की सुव्यवस्था की जानी चाहिए। ताकि आने वाली पीढियां यहां कि संमृद्व सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन कर सके। उन्होने सपत्नीक परिवार के साथ पाŸवनाथ भगवान कि पूजा अर्चना की। बुधवार को चैन्नई हाईकोर्ट के मु य न्यायाधीश का सोनार किले में स्थित चिंतामणी भगवान मंदिर परिसर में जैसलमेर लौद्रवपुर पाŸवनाथ जैन श्वेता बर ट्रस्ट के तत्वावधान में पारंपरागत ढंग से स्वागत किया। सहमंत्री नेमीचंद जैन, ट्रस्टी अर्जुन भंसाली, कोषाध्यक्ष शेरसिंह राखेचा, महेन्द्र भाई बापना ने उनका तिलक, साफा व माल्यार्पण कर मांगलिक श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होने सपरिवार चिंतामणी पार्श्वनाथ भगवान कि 2072 वर्ष पुरानी प्रतिमा के दर्शन किए, जिस पर विशुद्ध मोतियों के पाउडर का पेष्ट बनाकर विलेपन किया है । उन्होंने 15वीं शताब्दी का जिनभद्र सूरी ज्ञान भंडार में संग्रहित ताड़पत्रों व भोजपत्रों पर स्वर्ण व रजत चित्रांकित दृश्यों का अवलोकन किया । उन्होंने पटवा हवेली की सुन्दरता को भी निहारा। पटवा हवेली के वंशज महेन्द्र भाई बापना व अर्जुन भंसाली व शेरसिंह राखेचा ने पारंपरिक ढंग से स्वागत कर जैसलमेर जुहारिये पुस्तक भेंट की ।

एस. भास्कर व उनके परिवार ने मंदिरो की विशिष्ट वास्तुकला, शिल्प सौदर्य एवं मूर्तिकला को देखकर अभिभूत से हो गए। उन्होंने कहा कि जैसलमेर कला वैभव का अदभूत खजाना है। इसके समूचित संरक्षण की सुव्यवस्था की जानी चाहिए। ताकि आने वाली पीढियां यहां कि संमृद्व सांस्कृतिक विरासत का अवलोकन कर सके ।

Published on:
30 Aug 2018 08:00 am