पिता यदि जीवन के पहले गुरु बन जाएं, तो बेटी के सपनों को दिशा भी मिलती है और ऊंचाई भी। इसी सत्य को साकार रूप दिया है स्वाति व्यास ने, जिन्होंने पिता के मार्गदर्शन को अपना संकल्प बनाया और न्यायिक सेवा में शीर्ष स्थान प्राप्त कर नई पहचान गढ़ी।
पिता यदि जीवन के पहले गुरु बन जाएं, तो बेटी के सपनों को दिशा भी मिलती है और ऊंचाई भी। इसी सत्य को साकार रूप दिया है स्वाति व्यास ने, जिन्होंने पिता के मार्गदर्शन को अपना संकल्प बनाया और न्यायिक सेवा में शीर्ष स्थान प्राप्त कर नई पहचान गढ़ी। सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार व्यास की पुत्री स्वाति के लिए बचपन से ही घर एक पाठशाला रहा, जहां न्याय, अनुशासन और विचारशीलता के पाठ सहज ही आत्मसात होते गए।
पिता के फैसलों को समझना, उनकी कार्यशैली को देखना और जीवन के प्रति उनकी सजग दृष्टि को अपनाना, यह सब स्वाति के व्यक्तित्व का हिस्सा बनता चला गया। संस्कारों की इसी नींव पर खड़े होकर स्वाति ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी में शीर्ष स्थान प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा में भी पूरे राज्य में प्रथम स्थान हासिल कर एक नई मिसाल कायम की। यह उपलब्धि वर्षों की साधना, अनुशासन और अटूट विश्वास का परिणाम रही।
परिवार का अध्ययनशील वातावरण और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित जीवन दृष्टि ने स्वाति को लक्ष्य के प्रति एकाग्र रखा। समय का संतुलन, मेहनत की निरंतरता और आत्मविश्वास ने उन्हें कठिन राह में भी आगे बढ़ने का साहस दिया। परिवार में प्रेरणा का यह स्रोत और भी व्यापक है। बड़े भाई शरद व्यास न्यायिक सेवा में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, जिन्होंने हर मोड़ पर स्वाति को दिशा दी। चाकसू में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में कार्यरत स्वाति का विश्वास है कि सफलता किसी एक क्षण की उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास की यात्रा है।
मैट्रो कोर्ट से सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार व्यास ने पांच साल तक स्थायी चेयरमैन लोक अदालत, सीकर के पद पर काम किया। उन्होंने पत्रिका से बातचीत में बताया कि एक पिता के रूप में बेटी की सफलता उनके लिए विशेष रूप से आनंददायी है। उनका मानना है कि बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सही सोच और नैतिक मूल्यों की शिक्षा देना भी आवश्यक है।
उन्होंने स्वाति को हमेशा स्वतंत्र सोचने, सही निर्णय लेने और समाज के प्रति संवेदनशील बनने की सीख दी। यही कारण है कि स्वाति आज एक जिम्मेदार न्यायिक अधिकारी के रूप में उभरकर सामने आई हैं। चाकसू में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत स्वाति व्यास का कहना है कि उनके पिता ही उनके सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने जीवन के प्रत्येक समय में उनका मार्गदर्शन किया और कभी हार न मानने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, सफलता के लिए आत्मविश्वास, निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच सबसे जरूरी हैं।