महंगा हुआ आशियानों और प्रतिष्ठानों को सजाना-संवारना -जैसाण में 15 प्रतिशत महंगी हुई रंग-रोगन से संबंधित सामग्री-दीवाली पर मुहमांगे दाम देकर भी नहीं मिल रहे श्रमिक
जैसलमेर. साज-सज्जा का पर्व दीवाली मनाने को आतुर जिले के बाशिंदों को इन दिनों महंगाई के कारण आशियाने को सजाने में पसीना आ रहा है। घरों व दुकानों आदि को सुन्दर बनाने के लिए उनका बजट भी चरमराने लगा है। इस बीच श्रमिकों का अभाव होने से स्थिति कोढ़ में खाज जैसी हो गई है। स्वर्णनगरी में दीवाली से पहले रंगाई-पुताई से संबंधित व्यवसाय करने तथा इस कार्य में जुटने वाले लोगों के तेजी का दौर चल रहा है। रंग-पेंट से लेकर अन्य हार्डवेयर का सामान बेचने वाले दुकानदारों को सांस लेने की फुर्सत नहीं मिल रही तो पेंटर्स के अलावा निर्माण संबंधी कार्यों के कारीगरों व मजदूरों को डेढ़ी हाजिरी कर काम निपटाने पड़ रहे हैं। हकीकत यह है कि गड़ीसर चौराहा व गोपा चौक में मजदूरी की उम्मीद में इंतजार करते श्रमिक इन दिनों देखने को नहीं मिल रहे हैं। मुह मांगे दाम देकर भी श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। शहर में घर-घर रंगाई-पुताई और गली-गली निर्माण कार्यों का जोर है। एक साथ इतनी मांग बढ़ जाने के चलते लोगों को काम करवाने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं और मांग बढऩे के चलते उनकी दिहाड़ी में भी बढ़ोतरी हो गई है।
अपने घरों को सुंदर बनाने व दीवाली को लेकर तैयारी मेंं हर कोई जुटा है। दुकानदार योगेश सांवल बताते हैं कि स्वर्णनगरी के मुख्य मार्गों में रंगों की दुकानों पर ग्राहकी बढ़ गई है। आम दिनों की तुलना में अधिक ग्राहकी देखने को मिल रही है। इसी तरह 300 रुपए प्रति लीटर के भाव बिक से ऑयल पेंट बिक रहा है, वहीं 800 रुपए का 20 किलो डिस्टेंबर की बिक्री हो रही है। इसी तरह दिहाड़ी 900 रुपए तक पहुंच गई है।
ढूंढने पर भी नहीं मिल रहे कामगार
-रंग-रोंगन करने वाले श्रमिकों की दिहाड़ी 500 से बढकऱ इन दिनों 800-900 रुपए तक पहुंच गई है। -मरममत या नए निर्माण के लिए तो इन दिनों श्रमिकों की कमी ही देखने को मिल रही है।
-निर्माण कार्यों के लिए बजरी व पत्थर आदि की ढुलाई करने वाले नहीं मिल रहे।