
थार मरुस्थल इस बार पूरी तरह 'फायर मोड' में है। अप्रेल के अंतिम दिनों में ही तापमान 46 डिग्री सेल्सियस पार कर चुका था, जिससे 35 वर्ष पुराने रिकॉर्ड पर खतरा गहराने लगा है। सामान्यतः इतनी गर्मी मई के अंत या जून में दर्ज होती है, लेकिन इस बार मौसम का पैटर्न समय से पहले ही टूट गया है। जैसलमेर और बाड़मेर तेजी से एक्सट्रीम हीट जोन बनते जा रहे हैं। वर्ष 1991 में जैसलमेर में 49.2 डिग्री और वर्ष 2016 में बाड़मेर में 49.5 डिग्री तापमान दर्ज हुआ था। वर्तमान स्थिति को देखते हुए इन रिकॉर्ड्स के टूटने की आशंका बढ़ गई है।
थार में बढ़ती गर्मी के पीछे वैज्ञानिक कारण भी स्पष्ट हो रहे हैं। एंटी साइक्लोन सक्रिय होने से गर्म हवा एक ही क्षेत्र में स्थिर हो जाती है। नमी की कमी और बादलों का अभाव सूर्य की तीव्र किरणों को सीधे धरातल तक पहुंचा रहा है।
-अप्रेल में ही 45-46 डिग्री तापमान दर्ज
-दिन और रात के तापमान में अंतर कम होता जा रहा
-लगातार बढ़ते हीट वेव दिनों की संख्या
-रेतीली भूमि की उच्च ऊष्मा अवशोषण क्षमता
-हरियाली और जल स्रोतों में लगातार कमी
-शहरीकरण और कंक्रीट सतहों का विस्तार
-कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता स्तर
अब जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर गर्मी की भीषणता का असर साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर के समय बाजारों में सन्नाटा छा रहा है। पर्यटन गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी हैं। होटल, गाइड और टैक्सी व्यवसाय पर सीधा असर पड़ा है। अस्पतालों में लू के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जबकि निर्माण कार्यों की गति धीमी हो गई है।
जैसलमेर की पारंपरिक वास्तुकला एक व्यावहारिक समाधान
भीषण गर्मी की चुनौती के बीच जैसलमेर की पारंपरिक वास्तुकला एक व्यावहारिक समाधान के रूप में सामने आई है। पीले बलुआ पत्थर से बने मकान, मोटी दीवारें और संकरी गलियां प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम की तरह काम करती हैं।
-अंदर का तापमान बाहर से 5-7 डिग्री कम रहता है
-प्राकृतिक वेंटिलेशन से हवा का सतत प्रवाह बना रहता है
-एसी और कूलर पर निर्भरता घटती है
-ऊर्जा की बचत और पर्यावरण संरक्षण संभव
-हवेलियों में बने आंगन, झरोखे और जाली संरचना तापमान नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाती है।
जानकारों के अनुसार थार का यह बदलता स्वरूप आने वाले महीनों में और गंभीर हो सकता है। मई और जून में तापमान 48 से 50 डिग्री तक पहुंचने की आशंका है, जिससे जनजीवन पर और दबाव बढ़ेगा।
जलवायु विश्लेषक डॉ. आरके मेहता के अनुसार थार क्षेत्र में एंटी साइक्लोन की सक्रियता और नमी की कमी ने तापमान को असामान्य स्तर तक पहुंचा दिया है। रेतीली सतह सूर्य की गर्मी को तेजी से अवशोषित करती है, जिससे सतही तापमान तेजी से बढ़ता है। वनस्पति की कमी और बढ़ता कार्बन उत्सर्जन इस स्थिति को और गंभीर बना रहा है। यदि यही ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले समय में 48 से 50 डिग्री तापमान सामान्य स्थिति बन सकता है। ऐसे में जल संरक्षण, हरित क्षेत्र बढ़ाने और पारंपरिक निर्माण तकनीकों को अपनाना जरूरी हो गया है।
Published on:
01 May 2026 09:07 pm
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