विश्व के कोने-कोने से लोग यहां होंगे। मरू महोत्सव..04 दिन में सिमट जाएगी पूरी कला-संस्कृति और विरासत की वैभवता..इसमें सबसे अलग है ऊंटों के संग एक अलग ही अंदाज। ऊंट खेलेंगे, नाचेंगे और कई करतब दिखाएंगे। तैयार हो रहे है बीएसएफ के वे ऊंट जिन्हें देखने विश्व के पर्यटनप्रेमी उत्साहित है।
विश्व के कोने-कोने से लोग यहां होंगे। मरू महोत्सव..04 दिन में सिमट जाएगी पूरी कला-संस्कृति और विरासत की वैभवता..इसमें सबसे अलग है ऊंटों के संग एक अलग ही अंदाज। ऊंट खेलेंगे, नाचेंगे और कई करतब दिखाएंगे। तैयार हो रहे है बीएसएफ के वे ऊंट जिन्हें देखने विश्व के पर्यटनप्रेमी उत्साहित है।
फ्लैश बैक
- मरु महोत्सव का साथ 1979 में हुए पहले आयोजन से ऊंट साथ है। तब प्रशासन और पंचायत समितियां इसमें व्यवस्था करती थी।
- 1990 के बाद सीमा सुरक्षा बल के प्रशिक्षित ऊंट हैं।
शोभायात्रा की रंगत- केमल माउंटन बैंड
मरु महोत्सव का जैसलमेर में आयोजनों का आगाज शोभायात्रा से होता है। इसमें शामिल होता है, दुनिया का एकमात्र केमल माउंटेन बैंड। जिसमें बल के बांके जवान उतने ही सुशोभित और मतवाले-नखराले ऊंटों की पीठ पर बैठ कर विभिन्न वाद्ययंत्रों से संगीत की मधुर लहरियां रास्ते भर में बिखेरते चलते हैं।
करतब दिखाते ऊंट
महोत्सव के दूसरे दिन जैसलमेर के डेडानसर मैदान में बल के प्रशिक्षित ऊंट अपने करतबों से देखने वालों को अचम्भे की दुनिया में दाखिल करवा देते हैं।
यह अलग
- ऊंटों की पीठ पर सीसुब के जवानों का योगाभ्यास
- पोलो मैच
- केमल टेटू शो
- श्रंृगार प्रतियोकिता- केमल रेस
महोत्सव की जान हैं ऊंट
मरु महोत्सव को दुनियाभर के सैलानियों के बीच लोकप्रिय बनाने में ऊंटों की भूमिका अत्यंत अहम है। मरु महोत्सव का आगाज 1979 से हुआ और पहले आयोजन से ही ऊंट इसमें पूरी तरह से रचा-बसा है। सीमा सुरक्षा बल के प्रशिक्षित ऊंट तो पूरी तरह से एक करिश्मा रचते हैं।
- विजय बल्लाणी, संस्कृतिविद्